हरियाणा का बड़ा कदम: अब कचरे से जगमगाएंगे शहर, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत 5 जिलों में लगेंगे 'वेस्ट-टू-एनर्जी' प्लांट

Edited By Isha, Updated: 17 Apr, 2026 06:10 PM

haryana s major move cities to now shine bright with waste

हरियाणा सरकार ने राज्य को 'कूड़ा मुक्त' बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। प्रदेश के पाँच प्रमुख शहरों, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल और हिसार

चंडीगढ़:  हरियाणा सरकार ने राज्य को 'कूड़ा मुक्त' बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। प्रदेश के पाँच प्रमुख शहरों, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल और हिसार में अत्याधुनिक 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (कचरे से बिजली) संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस परियोजना के पूरे होने से न केवल दशकों पुराने कूड़े के पहाड़ों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि राज्य के ऊर्जा कोटे में भी इजाफा होगा।

कूड़े से बनेगा 'ग्रीन कोल' और बिजली
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना को दो अलग-अलग तकनीकों पर विभाजित किया गया है।यहां NTPC के सहयोग से 'वेस्ट-टू-चारकोल' प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन प्लांटों में रोजाना करीब 3,000 टन कचरे को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाला 'ग्रीन चारकोल' बनाया जाएगा, जिसका उपयोग बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में होगा। हिसार, करनाल और पंचकूला (बिजली उत्पादन): इन जिलों में पीपीपी (PPP) मोड पर ऐसे प्लांट प्रस्तावित हैं जो कचरे को जलाकर सीधे बिजली पैदा करेंगे।

क्यों पड़ी इस प्रोजेक्ट की जरूरत?
हरियाणा के कई शहरों में 'लिगेसी वेस्ट' (पुराना जमा कचरा) एक गंभीर संकट बन चुका है। गुरुग्राम का बंधवाड़ी लैंडफिल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ कूड़े के पहाड़ से निकलने वाले जहरीले तरल (लीचेट) ने भूजल को प्रदूषित कर दिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सख्ती के बाद, सरकार ने अब कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

 
अधिकारियों का क्या कहना है?
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारा लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इन सभी प्लांटों को पूरी क्षमता के साथ शुरू करना है। सोनीपत में सफल ट्रायल के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है। इससे शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में भी बड़ा सुधार होगा।सरकार की योजना आने वाले समय में इन प्लांटों की क्षमता बढ़ाने की है ताकि आसपास के छोटे नगर निकायों (Municipalities) का कचरा भी यहीं लाकर प्रोसेस किया जा सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी कचरा प्रबंधन की समस्या सुलझ जाएगी।

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