हरियाणा में बिजली का झटका, बढ़ जाएगा आपका बिल...अब प्रति यूनिट के देने होंगे इतने पैसे

Edited By Isha, Updated: 12 Apr, 2026 01:57 PM

electricity shock in haryana your bill will increase

हरियाणा में इस साल बिजली के बिलों में सीधे तौर पर कोई बदलाव नहीं किया गया था, जिससे आम जनता ने राहत की सांस ली थी। लेकिन अब उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगमों ने एक नया दांव चला

डेस्क: हरियाणा में इस साल बिजली के बिलों में सीधे तौर पर कोई बदलाव नहीं किया गया था, जिससे आम जनता ने राहत की सांस ली थी। लेकिन अब उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगमों ने एक नया दांव चला है। निगमों ने ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) के नाम पर 47 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त वसूली के लिए विनियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। अगर आयोग इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है, तो मध्यम और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं के मासिक बिल में एक बड़ी उछाल देखने को मिलेगी।

 

दरअसल, हरियाणा में साल 2022-23 से ही फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) के जरिए उपभोक्ताओं से वसूली की जा रही है। वर्तमान में जो उपभोक्ता 200 यूनिट से ज्यादा बिजली फूंकते हैं, उन्हें 47 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। अब बिजली निगम इसी वसूली को नए नाम (FPPAS) के साथ वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, 200 यूनिट से कम खपत वाले छोटे उपभोक्ताओं का खर्च पहले की तरह सरकार वहन करेगी, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए यह 'दोहरी मार' जैसा साबित होगा।
 

प्रदेश में बिजली उत्पादन और आपूर्ति का काम दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। कोयले के दामों में अस्थिरता और पीक सीजन में बाहरी स्रोतों से महंगी बिजली खरीदने के कारण प्रति यूनिट लागत 7.35 रुपये से बढ़कर 7.48 रुपये पर पहुंच गई है। इस बढ़ती लागत का असर सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। आंकड़ों की मानें तो नए वित्त वर्ष में सरकार को करीब 1089 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी। कुल सब्सिडी का आंकड़ा अब 6782 करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।

 

प्रदेश के करीब 7 लाख किसानों के लिए बिजली दरें पहले की तरह ही रियायती रहेंगी। किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट का ही भुगतान करना होगा। दिलचस्प बात यह है कि इस साल किसानों के लिए बिजली की अनुमानित खपत को 9 हजार मिलियन यूनिट से बढ़ाकर 10 हजार मिलियन यूनिट कर दिया गया है। इस बिजली की वास्तविक लागत लगभग 7 हजार करोड़ रुपये बैठती है, जिसमें से किसान केवल 123 करोड़ रुपये चुकाएंगे और बाकी की भारी-भरकम राशि सरकार सब्सिडी के रूप में बिजली निगमों को देगी।

 

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