पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले वाहन मालिकों को बड़ी राहत, 2019 का ये आदेश खारिज

Edited By Isha, Updated: 02 Jun, 2026 07:56 AM

major relief for vehicle owners retaining old and favorite vehicle numbers

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ किया है कि यदि पुराने वाहन नंबरों को नई HR सीरीज में बदला जाता है, तो इसके

डेस्क:  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ किया है कि यदि पुराने वाहन नंबरों को नई HR सीरीज में बदला जाता है, तो इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता, चाहे नंबर वीआईपी हो या पसंदीदा। हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने 14 से अधिक याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस आदेश को अवैध माना, जिसके तहत पसंदीदा नंबरों को नई सीरीज में बदलने पर शुल्क वसूला जा रहा था।

यहां पढ़िए क्या था विवाद?
मामला उन वाहन नंबरों से जुड़ा था जो मोटर वाहन अधिनियम, 1988 लागू होने से पहले जारी हुए थे। इन नंबरों की शुरुआत एचआर (HR) के बजाय पुरानी सीरीज के अक्षरों से होती थी। वाहन मालिकों का कहना था कि सरकार पहले कई बार अदालत में कह चुकी है कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा। लेकिन 8 नवंबर 2019 को जारी आदेश में सरकार ने पसंदीदा नंबरों के लिए फीस लेने का फैसला कर लिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन पंजीकरण नंबरों की वैधता और उनसे जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार इस विषय में अपने स्तर पर नियम नहीं बना सकती। अदालत ने कहा कि हरियाणा सरकार ने केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर शुल्क वसूली की नीति बनाई, जबकि इसके लिए उसे कानूनन अधिकार नहीं था। इसलिए यह आदेश अवैध है।


कोर्ट ने कहा कि पुराने नंबरों को समान मूल्य वाले नए नंबरों में बदला जा सकता है। उदाहरण: HRK-4 → HR-0004 या HRO-10 → HR-0010 से समझ सकते हैं। इस प्रक्रिया के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। संयुक्त पंजाब के समय के नंबर धारकों को हाईकोर्ट के इस फैसले का फायदा मिलेगा। इसके अलावा, पुरानी सीरीज वाले वाहन मालिकों को, VIP और फैंसी नंबर रखने वालों को, ऐसे वाहन मालिक जो नंबर को नई HR सीरीज में बदलवाना चाहते हैं।

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के 8 नवंबर 2019 के उस आदेश को अवैध ठहरा दिया, जिसके आधार पर पसंदीदा नंबरों को नई सीरीज में बदलने के लिए शुल्क मांगा जा रहा था। अब सरकार ऐसे मामलों में अतिरिक्त फीस नहीं वसूल सकेगी।


 

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