अस्पताल की 'शर्मनाक' करतूत: 3 महीने के मासूम की मौत, शव के बदले अस्पताल ने मांगा 5 लाख का बिल

Edited By Isha, Updated: 05 Apr, 2026 03:46 PM

hospital demands 5 lakh bill in exchange for body

सेक्टर 16 स्थित एशिया मोरिंगो (पूर्व में QRG) अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहाँ दिल की बीमारी के चलते भर्ती कराए गए एक 3 महीने के मासूम बच्चे की 12 दिनों के इलाज के बाद मौत हो गई

फरीदाबाद: सेक्टर 16 स्थित एशिया मोरिंगो (पूर्व में QRG) अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहाँ दिल की बीमारी के चलते भर्ती कराए गए एक 3 महीने के मासूम बच्चे की 12 दिनों के इलाज के बाद मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर के बाहर परिजनों ने जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के साथ-साथ शव को बंधक बनाने के आरोप लगाए हैं।

लोन लेकर शुरू कराया था इलाज, पैकेज पर भी विवाद
मृतक बच्चे की दादी वंदना ने बताया कि बच्चे के दिल में परेशानी थी, जिसके चलते उसे 23 तारीख को अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। वंदना का आरोप है कि जब उन्होंने रिपोर्ट मांगी तो डॉक्टरों ने मना कर दिया और तुरंत पैसों का इंतजाम करने को कहा। परिवार ने बच्चे की जान बचाने के लिए 5 लाख रुपये का लोन लिया और अस्पताल में जमा कराया। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर राजेश ने उन्हें 10 दिन का पैकेज और 4 लाख रुपये का खर्च बताया था, लेकिन बिलिंग काउंटर पर जाने पर उन्हें खर्चों में भारी विसंगति देखने को मिली।

 
परिजनों का सबसे बड़ा आरोप डॉक्टर विशाल और उनकी टीम की कार्यप्रणाली पर है। दादी का कहना है कि ऑपरेशन के बाद बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया था। दो-तीन दिन बाद उसकी हालत में सुधार देख उसे नॉर्मल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। बच्चा ठीक था और परिवार को उम्मीद जगी थी, लेकिन अचानक बच्चे की हालत दोबारा बिगड़ गई और उसे फिर से वेंटिलेटर पर डाल दिया गया। परिजनों का संदेह है कि वार्ड में शिफ्ट करने के बाद बच्चे को कोई गलत दवाई या इंजेक्शन दिया गया, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

 बच्चे की मौत के बाद जब दुखी माता-पिता ने अस्पताल प्रबंधन से बच्चे का शव मांगा, तो आरोप है कि अस्पताल ने शव देने से पहले बकाया बिल के रूप में 4 से 5 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन पहले आधा पैसा माफ करने की बात कह रहा था, लेकिन बाद में अपनी बात से मुकर गया और कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनसे बात करने सामने नहीं आया।

 
अस्पताल के बाहर बिलखते परिजनों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जब बच्चा ठीक हो रहा था, तो अचानक उसकी मौत कैसे हुई? उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जिस भी डॉक्टर की लापरवाही के कारण मासूम की जान गई है, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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