राव नरेंद्र ने साफ शब्दों में कहा- 'कांग्रेस के गद्दारों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा'

Edited By Manisha rana, Updated: 05 Apr, 2026 12:37 PM

congress traitors will not be spared under any circumstances  rao narendra

हरियाणा कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई कथित क्रॉस वोटिंग का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के भीतर मची सियासी हलचल के बीच हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर उसे पार्टी आलाकमान को भेज...

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई कथित क्रॉस वोटिंग का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के भीतर मची सियासी हलचल के बीच हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर उसे पार्टी आलाकमान को भेज दिया है। इस बीच प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने बागी तेवर दिखाने वालों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि “कांग्रेस के गद्दारों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पार्टी में अनुशासनहीनता और गद्दारी कतई बर्दाश्त नहीं होगी।”

राव नरेंद्र के इस बयान ने साफ कर दिया है कि प्रदेश कांग्रेस अब इस पूरे प्रकरण को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। पार्टी नेतृत्व इसे केवल क्रॉस वोटिंग का मामला नहीं, बल्कि संगठन के भीतर निष्ठा, अनुशासन और राजनीतिक प्रतिबद्धता की कसौटी के रूप में देख रहा है।

पांच विधायकों पर लगे थे ‘क्रॉस वोट’ के आरोप

गौरतलब है कि हरियाणा राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के खिलाफ पार्टी के ही पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे। जिन विधायकों के नाम इस विवाद में सामने आए, उनमें शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेणु बाला (साढ़ौरा), इलियास (पुनहाना), मोहम्मद इजरायल (हथीन) और जरनैल सिंह (रतिया) शामिल हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में भूचाल आ गया था। पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा रही कि आखिर किस स्तर पर पार्टी लाइन से हटकर मतदान हुआ और इसके पीछे किन राजनीतिक समीकरणों ने काम किया।

धर्मपाल मलिक की अगुवाई में हुई जांच

इस संवेदनशील मामले को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति को सौंपा गया था। इस समिति का नेतृत्व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने किया। पांच सदस्यीय इस समिति में रोहित जैन, अनिल धनतोड़ी, कैलाशो सैनी और अकरम खान को भी शामिल किया गया। समिति ने पूरे मामले की गंभीरता से सुनवाई की और संबंधित विधायकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में सभी पहलुओं को समेटते हुए पार्टी आलाकमान को विस्तृत फीडबैक भेजा गया है।

शैली चौधरी और रेणु बाला ने रखा अपना पक्ष

सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान शैली चौधरी और रेणु बाला स्वयं समिति के समक्ष पेश हुईं। दोनों महिला विधायकों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को ही वोट दिया था। उन्होंने समिति के सामने यह भी कहा कि उन्होंने मतदान के दौरान अपना वोट नेता प्रतिपक्ष को दिखाकर ही डाला था। ऐसे में उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। हालांकि, अब अंतिम निर्णय समिति नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान के स्तर पर होगा।

दिल्ली दरबार के फैसले पर टिकी हरियाणा कांग्रेस की नजर

अब इस पूरे घटनाक्रम पर हरियाणा कांग्रेस ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सियासत की भी नजरें टिक गई हैं। अगर पार्टी आलाकमान इस रिपोर्ट के आधार पर कोई बड़ा फैसला लेता है, तो उसका असर न केवल आरोपित विधायकों के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा, बल्कि हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी शक्ति-संतुलन पर भी दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह मामला आने वाले दिनों में हरियाणा कांग्रेस के भीतर ‘अनुशासन बनाम बगावत’ की बड़ी बहस को और तेज कर सकता है।

हरियाणा कांग्रेस में बवाल: पांच विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

हरियाणा कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान कथित क्रॉस वोटिंग का मामला अब सियासी विस्फोट का रूप लेता जा रहा है। अनुशासन समिति की रिपोर्ट पार्टी आलाकमान तक पहुंच चुकी है और प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर ‘गद्दारी’ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजरें दिल्ली दरबार के फैसले पर टिक गई हैं।

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