हरियाणा एक्सटेंशन लेक्चररों को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने इस मांग को किया खारिज

Edited By Isha, Updated: 04 Apr, 2026 06:27 PM

major blow to haryana extension lecturers high court rejects key demand

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत हजारों एक्सटेंशन लेक्चररों (Extension Lecturers) को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें लेक्चररों ने अपनी

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत हजारों एक्सटेंशन लेक्चररों (Extension Lecturers) को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें लेक्चररों ने अपनी सेवानिवृत्ति या सेवा की आयु सीमा को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान सेवा विस्तार का कानूनी अधिकार नहीं रख सकते।

दरअसल, हरियाणा के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत एक्सटेंशन लेक्चररों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार की उस नीति को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें 58 वर्ष की आयु में कार्यमुक्त करने का प्रावधान है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक पदों पर सेवा की आयु अधिक होनी चाहिए। उन्होंने दलील दी थी कि कुछ विशेष श्रेणियों और पुनर्नियुक्ति के मामलों में यह सीमा 60 वर्ष या उससे अधिक है, इसलिए उनके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए कहा कि एक्सटेंशन लेक्चरर और नियमित (Regular) सहायक प्रोफेसरों की सेवा शर्तें अलग-अलग होती हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नियमित कर्मचारियों और अनुबंध पर रखे गए लेक्चररों की तुलना नहीं की जा सकती।सेवा की आयु तय करना सरकार का नीतिगत मामला है, जिसमें अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगी जब तक कि वह पूरी तरह से मनमाना न हो। चूंकि हरियाणा में नियमित सहायक प्रोफेसर भी 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, इसलिए एक्सटेंशन लेक्चरर इससे अधिक की मांग नहीं कर सकते।


हालांकि कोर्ट से कानूनी झटका लगा है, लेकिन हरियाणा सरकार ने विधायी स्तर पर लेक्चररों को कुछ राहत जरूर दी है। हाल ही में 'हरियाणा एक्सटेंशन लेक्चरर और गेस्ट लेक्चरर (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम' में संशोधन किया गया है। इसके तहत 15 अगस्त 2024 तक 5 साल की सेवा पूरी करने वाले लेक्चररों को 58 वर्ष की आयु तक नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। अप्रैल 2026 की अपडेट के अनुसार, पात्र लेक्चररों का मानदेय बढ़ाकर 57,700 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जिसमें अब सरकारी कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता (DA) भी जोड़ा जाएगा।

लेक्चररों की अगली रणनीति
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद एक्सटेंशन लेक्चरर एसोसिएशन में मायूसी है। सूत्रों के मुताबिक, लेक्चरर अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से उच्च शिक्षा में सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सम्मानजनक सेवा अवधि नहीं मिल रही है।

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