Edited By Krishan Rana, Updated: 02 Apr, 2026 08:35 PM
हरियाणा सरकार प्रदेश की जेल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार प्रदेश की जेल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में रोहतक में बन रही हाई सिक्योरिटी जोन जेल आगामी छह माह में पूरी तरह तैयार हो जाएगी। यह जानकारी हरियाणा के गृह सचिव सुधीर राजपाल ने पंजाब केसरी से एक्सक्लूसिव बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि रोहतक हाई सिक्योरिटी जोन जेल का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है।
सुधीर राजपाल ने कहा कि प्रदेश की जेलों को अधिक सुरक्षित, अनुशासित और आधुनिक बनाने के लिए सरकार कई स्तरों पर व्यापक सुधार कर रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के सभी जिलों में जेल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा तथा चौकस बनाने के लिए विशेष रणनीति पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण रिव्यू मीटिंग में जेल सुरक्षा, मानव संसाधन, निगरानी तंत्र और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई। सरकार का स्पष्ट फोकस इस बात पर है कि जेलों के भीतर सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की कोई गुंजाइश न रहे।
गृह सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि प्रदेश की जेलों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हुए हैं, जिससे सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर असर पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार पुलिस विभाग की तर्ज पर जेल विभाग में भी एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) भर्ती करने के विकल्प पर गंभीर मंथन कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जेल विभाग में एसपीओ की नियुक्ति की जाती है, तो उनके लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य होगा, ताकि वे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जेल वातावरण में पूरी दक्षता और अनुशासन के साथ काम कर सकें।
रोहतक में बन रही हाई सिक्योरिटी जोन जेल को हरियाणा की जेल प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा मॉडल माना जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद प्रदेश में खतरनाक, संगठित अपराध और हाई-रिस्क कैदियों की निगरानी व सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
सरकार के इस कदम को हरियाणा की जेल व्यवस्था को हाईटेक, अनुशासित और ज्यादा सुरक्षित बनाने की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
हरियाणा की जेलों में सुरक्षा को लेकर विशेष अलर्ट पर प्रशासन
हरियाणा में जेल सुरक्षा को लेकर इस समय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। प्रदेश में जेल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए केवल ढांचागत सुधार ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नेतृत्व, निगरानी तंत्र और रणनीतिक नियंत्रण पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में डीजीपी जेल आलोक मित्तल का नाम भी प्रमुखता से सामने आता है, जिनकी गिनती हरियाणा के कुशल, सूझबूझ वाले और अनुभवी पुलिस प्रशासकों में की जाती है।
आलोक मित्तल का लंबा प्रशासनिक अनुभव उन्हें जेल जैसे संवेदनशील विभाग के लिए एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है। वे हरियाणा में पहले सीआईडी चीफ जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं, वहीं जिला पुलिस अधीक्षक के रूप में भी कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस हलकों में आलोक मित्तल की पहचान एक कर्मठ, शांत, रणनीतिक और प्रभावी अधिकारी के रूप में होती है। वे उन अधिकारियों में माने जाते हैं जो जमीन पर काम, सिस्टम की समझ और संवेदनशीलता—तीनों को साथ लेकर चलते हैं।
शैक्षणिक योग्यता और प्रशासनिक अनुभव ने बनाया मजबूत अफसर
आलोक मित्तल का जन्म 1969 में इलाहाबाद में हुआ। वे शैक्षणिक रूप से भी बेहद मजबूत पृष्ठभूमि रखते हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से साइबर लॉ में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। उन्होंने 1993 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस सेवा में प्रवेश किया और तब से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
सीआईडी, एसीबी और जांच एजेंसियों का गहरा अनुभवआलोक मित्तल का करियर केवल परंपरागत पुलिसिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे इंटेलिजेंस, जांच, साइबर और संस्थागत सुरक्षा जैसे बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे हैं। वे चार साल से अधिक समय तक हरियाणा सीआईडी प्रमुख रहे। जुलाई 2020 में उन्हें हरियाणा में सीआईडी के एडीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय उनकी नियुक्ति को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। वे एनआईए में प्रतिनियुक्ति पूरी करने के बाद हरियाणा कैडर में लौटे थे, जिससे उनके अनुभव में राष्ट्रीय स्तर की जांच और सुरक्षा प्रणाली की समझ भी शामिल हो गई।
वर्तमान में वे एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के प्रमुख के रूप में भी कार्यरत हैं, और उनकी प्रशासनिक कार्यशैली को देखते हुए जेल विभाग में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर भी उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रोहतक हाई सिक्योरिटी जेल और सख्त निगरानी—हरियाणा की नई सुरक्षा नीति का संकेत
रोहतक में हाई सिक्योरिटी जोन जेल का निर्माण और दूसरी ओर जेल विभाग में सुरक्षा, स्टाफिंग और प्रबंधन को लेकर चल रहे सुधार इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि हरियाणा सरकार अब जेल प्रशासन को केवल बंदी प्रबंधन तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा का अहम हिस्सा मानकर देख रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आधुनिक हाई सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित मानवबल, तकनीकी निगरानी और अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ प्रभावी ढंग से काम करें, तो हरियाणा की जेल व्यवस्था आने वाले समय में देश के मजबूत मॉडलों में शामिल हो सकती है।
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