Edited By Krishan Rana, Updated: 23 Mar, 2026 08:08 PM

हरियाणा सरकार ने राज्य में पानी को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने राज्य में पेयजल और सिंचाई के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत करीब 8 लाख ट्यूबवेल के पानी की जांच कराई जाएगी, ताकि जल में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके।
जानकारी के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष में लगभग 3 लाख ट्यूबवेल के पानी की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन और बैक्टीरिया की मात्रा कितनी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में पानी को शुद्ध करने और प्रदूषण कम करने के उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने सेमग्रस्त और लवणीय भूमि को खेती योग्य बनाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं। अगले एक वर्ष में भिवानी, रोहतक, गुरुग्राम और झज्जर सहित कई जिलों में करीब एक लाख 40 हजार एकड़ भूमि को खेती के लायक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विभाग हरियाणा ने केंद्र सरकार के सहयोग से अगले तीन वर्षों में चार लाख 21 हजार एकड़ सेमग्रस्त भूमि के सुधार की व्यापक योजना तैयार की है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में एक लाख एकड़ भूमि सुधार के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 92 हजार एकड़ जमीन को कृषि योग्य बनाया जा चुका है।
बताया गया है कि करीब दो दशक पहले 13 जिलों में 6.82 लाख एकड़ भूमि को सेम और लवणीय श्रेणी में चिन्हित किया गया था, जिससे 724 गांवों के किसान प्रभावित थे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में तेजी आई है।
वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 163 गांवों में वर्टिकल और सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीक के जरिए करीब एक लाख 60 हजार एकड़ भूमि को खेती योग्य बनाने में सफलता मिली है। जबकि वर्ष 1996 से 2021 तक केवल 28,100 एकड़ भूमि का ही सुधार हो पाया था। सरकार के अनुसार, 2022-23 में 25,490 एकड़, 2023-24 में 78,155 एकड़ और 2024-25 में 51 हजार एकड़ भूमि को सुधार कर खेती के योग्य बनाया गया है।
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