Edited By Isha, Updated: 02 Apr, 2026 12:04 PM

रियाणा के उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं और कदाचार के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने सरकार के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों के
चंडीगढ़: हरियाणा के उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं और कदाचार के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने सरकार के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों के तीन मौजूदा और एक पूर्व कुलपति के खिलाफ व्यापक जांच का दायरा खोल दिया है। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक; गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (GJU), हिसार; दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल; और श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (SKAU), कुरुक्षेत्र हैं।
जांच में सबसे गंभीर मामला DCRUST, मुरथल का सामने आया है, जहाँ छात्र कोष के लगभग 50 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि को सरकारी बैंक के बजाय निजी बैंक में कम ब्याज दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में रखा गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी वित्तीय क्षति हुई। अन्य विश्वविद्यालयों की बात करें तो, MDU के पूर्व कुलपति राजबीर सिंह पर पौधों की खरीद और नियुक्तियों में अधिकारों के दुरुपयोग, GJU के प्रो. नरसी राम पर नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में धांधली, और SKAU के प्रो. करतार सिंह धीमान पर आरक्षण नियमों व रोस्टर के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
विजिलेंस ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) अर्शिंदर सिंह चावला ने इस जांच की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को एक तय समय सीमा में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जांच के घेरे में आए कुलपतियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है। फिलहाल, राज्य सरकार की इस सख्त कार्रवाई ने विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, और अब सबकी नजरें विजिलेंस की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जांच हो चुकी है शुरू
SV&ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को एक तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने का काम सौंपा गया है। अधिकारी ने कहा, "जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है ताकि वे आरोपों की जांच प्राथमिकता के आधार पर कर सकें, और संबंधित अधिकारियों ने इस पर अपना काम शुरू भी कर दिया है।"
इन विश्वविद्यालयों पर है जांच की आंच
जांच के दायरे में आए विश्वविद्यालयों और उन पर लगे आरोपों का ब्योरा इस प्रकार है:
- महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक: पूर्व कुलपति राजबीर सिंह पर अपने कार्यकाल के दौरान 20,000 पौधों की खरीद में वित्तीय हेरफेर और नियुक्तियों में अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं।
- गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (GJU), हिसार: कुलपति प्रो. नरसी राम पर विशेष रूप से नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है।
- दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल: यह मामला सबसे चौंकाने वाला है, जहाँ छात्र कोष के 50 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच हो रही है। आरोप है कि सरकारी नियमों को दरकिनार कर इस राशि को कम ब्याज दर वाले निजी बैंक में जमा कराया गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
- श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (SKAU), कुरुक्षेत्र: कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान पर आरक्षण नियमों और भर्ती रोस्टर का उल्लंघन करने के आरोप हैं।