हरियाणा की मंडियों में 'कच्ची पर्ची' खेल खत्म, हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार का बड़ा फैसला...अब ये फार्म होगा अनिवार्य

Edited By Isha, Updated: 01 Apr, 2026 02:28 PM

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हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर आखिरकार रोक लग गई है। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका के बाद की गई है।

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी ):  हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर आखिरकार रोक लग गई है। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका के बाद की गई है।

यह जनहित याचिका डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ने अपने अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया के माध्यम से दायर की थी। याचिका में हरियाणा की मंडियों में प्रचलित ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत बंद करने की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह 30 दिनों के भीतर शिकायत पर स्पष्ट और ठोस आदेश जारी करे। न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में बुधवार, 1 अप्रैल को राज्य सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए।
सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी आढ़ती किसान को ‘कच्ची पर्ची’ जारी नहीं करेगा। इसके स्थान पर फसल खरीद के बाद अनिवार्य रूप से ‘जे-फॉर्म’ ही किसान को दिया जाएगा, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली के चलते किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता था, जिससे उन्हें 30 से 40 प्रतिशत तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। सरकार के इस फैसले को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 
 
 

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