Edited By Manisha rana, Updated: 30 Mar, 2026 05:32 PM

हिसार निवासी गोकुल गोयल ने अपने घर को तपती गर्मी में भी प्राकृतिक तरीक़े से ठंडा रखने की एक अनोखी तरकीब अपनाई है।उन्होंने अपने घर की छत को पक्का करते समय मिट्टी से बने कुल्हड़ का इस्तेमाल किया है, जिसे उन्होंने कुल्हड़ छत का नाम दिया है।
हिसार (विनोद सैनी) : हिसार निवासी गोकुल गोयल ने अपने घर को तपती गर्मी में भी प्राकृतिक तरीक़े से ठंडा रखने की एक अनोखी तरकीब अपनाई है।उन्होंने अपने घर की छत को पक्का करते समय मिट्टी से बने कुल्हड़ का इस्तेमाल किया है, जिसे उन्होंने कुल्हड़ छत का नाम दिया है।गोकुल गोयल पेशे से एक आर्किटेक्ट हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में हमें सिखाया गया था कि एयर गैप के माध्यम से हम हीट को रोक सकते हैं। इसी एयर गैप तरीक़े को अपनाकर कुल्हड़ छत बनाई गई है। यह आइडिया उनका खुद का ही है।
गोकुल ने बताया कि कुल्हड़ मिट्टी से बनता है तो उसकी पानी सोखने की क्षमता भी होती है और वो खुद भी मटके जैसे ठंडे रहते हैं। घर की छत तैयार करते समय लैंटर पर उल्टा करके कुल्हड़ रखे गए और उल्टा रखने से उनके अंदर की हवा पैक हो गई। गोकुल ने बताया कि कुल्हड़ के ऊपर सीमेंट से फ्लोरिंग करके स्लोप बनाकर उसके ऊपर टाइल्स की टुकड़ियां लगाईं गईं। ये ग्लेज़्ड टाइल्स की टुकड़ियाँ 70% हीट रिफ्लेक्ट कर देती हैं। उन्होंने कहा कि बची हुई गर्मी कुल्हड़ रोक लेते हैं। अब हमारे घर की पहली मंजिल ग्राउंड फ्लोर जितना ही ठंडी रहती है। दूसरे घरों के मुक़ाबले हमारे घर का तापमान लगभग 5 से 6 डिग्री कम रहता है। उन्होंने बताया कि बिजली के बिल में भी तीस प्रतिशत तक की कमी हुई है। हमारे घर में गर्मी की शुरुआत में अन्य घरों के मुक़ाबले दो महीने देरी से एसी चलाते हैं और जाती हुई गर्मी में भी दो महिने पहले एसी चलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि कुल्हड़ वाली छत की लागत साधारण छतों से अधिक ज़रूर है लेकिन अन्य बहुत फायदे हैं। यह छत पानी की लीकेज से और गर्मी की मार से आजीवन निश्चिंत कर देती है। गोकुल गोयल ने अपने घर को सामने की दिशा से गर्मी की तपन से बचाने के लिए बाँस की लकड़ियों के ढाँचे से कवर किया है। उन्होंने कहा कि यह तरकीब माँ के आँचल की तरह ही काम करती है जो हमें धूप और गर्म हवा से बचाती है। इससे घर में एसी की ज़रूरत मात्र चालीस प्रतिशत तक ही रह जाती है।
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