डिजिटल हुई कर्नाटक विधानसभा: देश में पहली बार लागू हुई AI-आधारित अटेंडेंस प्रणाली, स्पीकर यूटी खादर का बड़ा कदम

Edited By Isha, Updated: 29 Mar, 2026 07:08 PM

karnataka assembly goes digital

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता यूटी खादर पांचवी बार विधायक बनकर कर्नाटक विधानसभा में पहुंचे हैं। खादर ने साफ कर दिया है कि बात पक्ष और विपक्ष की नहीं है, बल्कि विस की गरिमा का ध्यान

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी ): कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता यूटी खादर पांचवी बार विधायक बनकर कर्नाटक विधानसभा में पहुंचे हैं। खादर ने साफ कर दिया है कि बात पक्ष और विपक्ष की नहीं है, बल्कि विस की गरिमा का ध्यान रखकर जनता से जुड़ मुद्दों के प्रभावी समाधान की ओर बढ़ना होगा। मात्र शोरगुल, हंगामा और व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बारे में पूछे जाने पर  कहा कि वे एक स्पष्ट और ईमानदार सच्चे दिल के इंसान हैं।

कर्नाटक विधानसभा अध्य़क्ष यूटी खादर ने बेंगलुरू स्थित अपने सरकारी आवास पर बातचीत में  क्षेत्र स्पष्ट किया कि विधानसभा केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सामूहिक व्यवहार और जिम्मेदारी से चलने वाली संस्था है। सदन की कार्यवाही को अनुशासनात्मक और व्यवस्थित ढंग से चलाना सभी साथी विधायकों की जिम्मेदारी है, बात पक्ष  विपक्ष की नहीं है, तभी जनता के मुद्दों का प्रभावी समाधान संभव है।

“विधायकों से ही बनती है विधानसभा”

विस अध्यक्ष यूटी खादर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कि विधानसभा की गुणवत्ता उसके सदस्यों के आचरण से तय होती है। किसी भी प्रदेश की विस हो,  व्यवधान से लोकतंत्र कमजोर होता है,  स्वस्थ बहस से नीति निर्माण मजबूत होता है। विस का कहना है कि मात्र सत्ता पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष दोनों की भूमिका अहम है। 

 राहुल गांधी नेक,स्पष्ट और ईमानदार नेता

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी को लेकर उन्होंने एक सवाल के उत्तर में कहा कि राहुल गांधी नेकदिल, स्पष्टवादी और ईमानदार व्यक्ति हैं। राहुल गांधी ऐसे नेता हैं जिनमें: सरल जीवनशैली  और स्पष्ट और साफ राजनीतिक सोच दिखाई देगी। ऐसे व्यक्तित्व लोकतंत्र में संवाद को बेहतर बनाने और राजनीति को जनहित से जोड़ने का काम करते हैं।

रचनात्मक राजनीति की अपील

अध्यक्ष ने कहा कि विधायक केवल विरोध के लिए विरोध न करें, बल्कि रचनात्मक सुझाव भी रखें और विस के सत्र में आकर सरकार को बेहतर काम करने के लिए अपना हर संभव सहयोग दें। कर्नाटक विस में विधायकों की संख्या 224 और यहां पर एमएलसी भी हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सीधे जीतकर सदन नहीं आएं लेकिन एमएलसी का अपना अहम योगदान है। बेहतर तैयारी के साथ कईं एमएलसी बेहतरीन कामकाज करते हैं। कर्नाटक के  हित में कईं ने बेहद ही अहम सुझाव और रचनात्मक काम किए हैं।

बजट सत्र को लेकर विस अध्यक्ष का कहना है कि राज्य की दिशा तय करने का यही वक्त था।कर्नाटक विधानसभा में हमारा प्रयास हैं कि बेहतर से बेहतर काम हो। यहां सुबह नौ बजे से रात्रि दस दस बजे तक मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा होती है। बजट सत्र समाप्त हो चुका है, इस बार का सत्र कई मायनों में अहम रहा है। इस बार भी आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं पर मंथन, किसानों, युवाओं, उद्योगों, सामाजिक कल्याण, राज्य की वित्तीय स्थिति बेहतर बनाने पर ही फोकस रहा है।

हर सदस्य की भूमिका अहम 
विस अध्यक्ष ने कहा कि सदन में आने वाले हर सदस्य की भूमिका अहम है, इसलिए संवाद और अनुशासन के साथ लोकतंत्र को मजबूत करें। सकारात्मक सोच से ही बेहतर शासन संभव है। 
विस अध्यक्ष बोले: “जनता ने जिम्मेदारी दी है, सहयोग करें” विस अध्यक्ष ने आमतौर पर सदन में होने वाले शोरगुल, हंगामे और कामकाज में बाधा पर चिंता जाहिर की, साथ ही कहा कि वे कठोर अनुशासन बनाने के पक्ष में हैं। इसलिए चेतावनी और समझाने के बाद भी नहीं मानने वालों पर कार्रवाई करने में उन्हें कोई गुरेज नहीं हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि सदन की कार्यवाही में बार-बार बाधा डालना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है : “जनता ने आपको चुनकर सदन में भेजा है, इसलिए आपकी जिम्मेदारी है कि आप सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें।”  विपक्ष का काम केवल विरोध करना नहीं, बल्कि मुद्दों को मजबूती से और जिम्मेदारी के साथ उठाना है। विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, व्यवधान नहीं। सदन में हंगामा जनता के मुद्दों को दबाता है। यदि विपक्ष सकारात्मक भूमिका निभाएगा, तो सरकार भी जवाबदेही के साथ काम करेगी। विधानसभा की गरिमा उसके सदस्यों के आचरण से तय होती है। स्पष्ट सी बात है शालीनता और अनुशासन से सदन की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और अव्यवस्था से जनता का भरोसा कमजोर होगा।उन्होंने कहा कि सदन को राजनीतिक टकराव का मंच नहीं, बल्कि समाधान का मंच बनाना होगा। कईं मौकों पर नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कदम उठाने से भी परहेज नहीं किया जाता।

विशेष प्रशिक्षण/वर्कशॉप की शुरुआत
यूटी खादर ने बताया कि  विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण/वर्कशॉप की शुरुआत। 2025 में उन्होंने यह विचार आगे बढ़ाया और 2026 में पहली बार राज्य के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए बजट की बारीकियों पर औपचारिक कार्यशाला भी आयोजित की गई। जिसमें केवल नारेबाजी तक सीमित ना रहकर बजट पढ़ना, राजस्व, आवंटन, खर्च, उपयोग और सदन में प्रभावी बहस जैसी चीजों को भी समझें। इसे विधायी गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक संस्थागत पहल माना गया। खादर ने प्रशिक्षण आधारित सुधार से भरने की कोशिश की। यह उनके कार्यकाल की एक ऐसी उपलब्धि मानी जा सकती है, जिसका असर केवल एक सत्र नहीं, बल्कि विधायी गुणवत्ता पर लंबे समय तक पड़ सकता है। विस अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही को डिजिटल और पेपरलेस दिशा में ले जाना चाहते हैं। एकाएक पेपरलैस करने की होड़ में वे शामिल नहीं हैं। 

AI-आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू 
कर्नाटक विधानसभा में 2024 के सत्र के दौरान पहली बार AI-आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू की गई। यह कदम प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे सदन की कार्यप्रणाली में डेटा-आधारित निगरानी और जवाबदेही का तत्व जुड़ा। सत्र में विधानसभा की उपस्थिति और कार्यवाही के आंकड़े भी उल्लेखनीय रहे। खादर के कार्यकाल में कई मौकों पर यह बात सामने आई कि वे सदन को अधिक उत्पादक और व्यवस्थित रूप से चलाने पर जोर देते हैं। 2025 के सत्र के बाद उन्होंने बताया कि 39 में से 37 विधेयक बहस और सहमति के बाद पारित हुए, जो एक तरह का रिकॉर्ड है।स्पीकर बनने के बाद यू. टी. खादर ने विधानसभा और विधान सौधा परिसर की सुरक्षा को भी गंभीरता से लिया। 2023 में एक सुरक्षा चूक के बाद उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर में बेहतर सुरक्षा तंत्र और संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी। 2025 और 2026 में विधान के बुनियादी ढांचे, प्रवेश व्यवस्था में बदलाव, सोलर पैनल जैसी परियोजनाओं को लेकर काम किया। 
 

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