Edited By Manisha rana, Updated: 22 May, 2026 10:24 AM

हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी सी.बी.आई. ने वीरवार को पंचकूला की विशेष सी. बी. आई. कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में 15 आरोपियों को नामजद किया गया है।
चंडीगढ़ : हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी सी.बी.आई. ने वीरवार को पंचकूला की विशेष सी. बी. आई. कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में 15 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, शेल कंपनियों के संचालक और निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
उधर, घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए सी.बी. आई. ने प्रदेश की टॉप ब्यूरोक्रेसी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी लगातार वरिष्ठ अफसरों से पूछताछ कर रही है। इसी कड़ी में वीरवार को हरियाणा के एक सीनियर आई. ए. एस. से सी.बी.आई. ने पूछताछ की है। ये लंबे समय तक पंचायत विभाग में आयुक्त एवं सचिव के पद पर कार्यरत रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सी.बी.आई. यह जानने की कोशिश कर रही है कि सरकारी विभागों के खातों से करोड़ों रुपए की निकासी के दौरान प्रशासनिक स्तर पर कौन-कौन अधिकारी जानकारी में थे और किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई।
दरअसल, कई दिनों से चल रही जांच के बीच तय अवधि को देखते हुए सी.बी.आई. ने पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। सी.बी.आई. के अनुसार इस मामले में कुल 15 आरोपियों जिनमें 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 शेल कंपनियां उनके 3 निदेशकों, पार्टनरों सहित और एक निजी व्यक्ति शामिल है। जांच एजेंसी ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत केस दर्ज किया है। सी.बी.आई. ने बताया कि जिन 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनके संबंध में जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि अन्य आरोपियों और दूसरे विभागों में सरकारी धन के गबन की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं।
चार्जशीट में घोटाले के प्रमुख किरदारों का जिक्र
सी.बी.आई. ने चार्जशीट में रिभव ऋषि जो आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक की सैक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा का पूर्व मैनेजर था। बाद में इसने ए.यू. स्मॉल फाइनैंस बैंक ज्वाइन कर लिया था। इसे इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना है। इसने फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते खुलवाकर सरकारी धन को वहां डायवर्ट करने की साजिश रची। दूसरा अभय जो बैंक में पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर था। इसने अगस्त 2025 में इस्तीफा दे दिया था। जांच के अनुसार, अभय और रिभव ने मिल कर फर्जी चेक और भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। स्वाति सिंगला भी मुख्य आरोपियों में से है जो अभय की पत्नी है। वह स्वास्तिक देश प्रोजैक्ट्स नामक कंपनी की मालकिन है।
आरोप है कि बैंक से फर्जी तरीके से निकाले गए करीब 300 करोड़ रुपए सीधे इसी कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। अभिषेक सिंगला भी आरोपियों में है जो स्वाति सिंगला का भाई है और उसी कंपनी में हिस्सेदार है। इसे भी फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसी तरह से सरकारी कर्मियों में अमित दीवान जो हरियाणा पावर जनरेशन कार्पोरेशन लिमिटेड में डायरैक्टर (फाइनैंस) के पद पर तैनात था। इसे मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि इसने रिश्वत लेकर सरकारी धन को गलत तरीके से निजी बैंकों में जमा करवाने और अवैध लेनदेन को अनदेखा करने में मदद की। मार्कीटिंग बोर्ड के वित्त और लेखा नियंत्रक राजेश सांगवान भी आरोपियों की सूची में है। इसके अलावा कुछ बिचौलिए, रियल एस्टेट डिवैल्पर्स और कुछ अन्य बैंक कर्मचारी शामिल हैं।
मास्टरमाइंड रिभव को कोर्ट ने एक दिन की ई.डी. हिरासत में भेजा
590 करोड़ रुपए के आई.डी.एफ. सी. फर्स्ट बैंक औरए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में ई.डी. ने वीरवार को मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि की 10 दिन की रिमांड खत्म होने के बाद उसे पंचकूला की पी.एम.एल.ए. कोर्ट (धनशोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत स्थापित विशेष अदालत) में पेश किया। जहां ई.डी. ने उसकी 4 दिन की और हिरासत मांगी, हालांकि कोर्ट की ओर से एक दिन की ही मिली। ई.डी. के मुताबिक, रिभव ऋषि चंडीगढ़ के सैक्टर-32 स्थित आई.डी.एफ. सी. फर्स्ट बैंक की ब्रांच में मैनेजर था। जांच में सामने आया है कि उसने फर्जी कंपनियां बनाकर हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के खातों से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की।
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