न्याय की हार! सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया, पर कागजों ने 15 साल जेल में रखा; हाई कोर्ट ने दी जमानत

Edited By Isha, Updated: 14 May, 2026 10:39 AM

he remained in jail for 15 years despite the cancellation of his sentence

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से दोषसिद्धि रद्द किए जाने के बावजूद 15 साल से अधिक समय तक जेल में बंद आरोपी को राहत देते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल दिखावटी

चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से दोषसिद्धि रद्द किए जाने के बावजूद 15 साल से अधिक समय तक जेल में बंद आरोपी को राहत देते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल दिखावटी अवधारणा नहीं बल्कि यह वास्तविक सांविधानिक अधिकार है और बिना वैध दोषसिद्धि के किसी व्यक्ति को जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि याची ने व्यवस्था का दोष भुगता है। याची को कैथल में हत्या के

मामले में पहले निचली अदालत ने दोषी ठहराया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया और उसके बरी होने की स्थिति बहाल हो गई। इसके बावजूद प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे रहने के कारण वह वर्षों तक हिरासत में रहा। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को इस प्रकार अनिश्चितकाल तक बाधित नहीं किया जा सकता। ब्यूरो

कोर्ट ने कहा कि संविधान में मिला स्वतंत्रता का अधिकार केवल कागजी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अब कोई प्रभावी दोषसिद्धि शेष नहीं है तो उसकी निरंतर कैद को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि लंबे समय तक हिरासत में रखना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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