यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने की बड़ी पहल: नालों की होगी ड्रोन मैपिंग, 2028 तक तैयार होगी व्यापक ट्रीटमेंट व्यवस्था

Edited By Manisha rana, Updated: 20 May, 2026 10:01 AM

major initiative to make yamuna pollution free

हरियाणा सरकार ने यमुना नदी में गिरने वाले सभी बड़े और छोटे नालों की जोन-वाइज ड्रोन मैपिंग कराने का फैसला लिया है। इस सर्वे के जरिए न केवल जल प्रवाह बल्कि जल गुणवत्ता की भी निगरानी की जाएगी।

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने यमुना नदी में गिरने वाले सभी बड़े और छोटे नालों की जोन-वाइज ड्रोन मैपिंग कराने का फैसला लिया है। इस सर्वे के जरिए न केवल जल प्रवाह बल्कि जल गुणवत्ता की भी निगरानी की जाएगी। दिल्ली में चल रहे मॉडल की तर्ज पर यह कदम प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान और स्रोत स्तर पर नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार को यमुना पुनरुद्धार और दिल्ली में पहुंचने वाले प्रदूषित जल को रोकने के लिए बनाई गई राज्य की व्यापक रणनीति की समीक्षा की।

बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और नालों की रियल टाइम मॉनिटरिंग पर विस्तार से चर्चा हुई। 9 नए एस.टी.पी. और 8 नए सी.ई.टी.पी. होंगे स्थापितःरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य के 34 शहरों में इस समय 1518 एम.एल.डी. क्षमता वाले 90 एस.टी..पी संचालित हैं। इसके अलावा 170 एम.एल.डी. क्षमता के 4 नए एस.टी.पी. निर्माणाधीन हैं, जबकि 227 एम.एल.डी. क्षमता वाले 9 एस.टी.पी. को अपग्रेड किया जा रहा है। औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण के लिए 184.5 एमएलडी क्षमता वाले 17 सी.ई.टी.पी. कार्यरत हैं।

इनमें से 2 सी.ई.टी.पी. अपग्रेड किए जा रहे हैं, जबकि 146 एम. एल. डी. क्षमता वाले 8 नए सी.ई.टी.पी. प्रस्तावित हैं। भविष्य की योजना के तहत प्रदेश में 510 एम.एल.डी. क्षमता वाले 9 नए एस.टी.पी. भी स्थापित किए जाएंगे। दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध पूरा होगा प्लानः हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एस.टी.पी., सी.ई.टी.पी. और ड्रेन टैपिंग परियोजनाओं को जोड़ते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है और इन्हें दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

'बी-क्लास' जल गुणवत्ता का लक्ष्यसरकार ने यमुना एक्शन प्लान-2019 के तहत यमुना नदी में 'बी-क्लास' जल गुणवत्ता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत बी.ओ.डी. स्तर 3 मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे कम, डिसॉल्व्ड ऑक्सीजन कम से कम 5 मिलीग्राम प्रति लीटर तथा कोलीफॉर्म स्तर निर्धारित मानकों के भीतर रखने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदूषण को स्त्रोत स्तर पर रोकने के लिए सिंचाई विभाग के सहयोग से प्रमुख नालों पर इन-सीटू ट्रीटमैंट सुविधाएं स्थापित करने की भी योजना है, ताकि गंदे पानी का उपचार डाऊनस्ट्रीम में फैलने से पहले ही किया जा सके। बैठक में सुधीर राजपाल, अनुराग अग्रवाल और योगेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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