Edited By Isha, Updated: 30 May, 2026 12:54 PM

देश के गन्ना किसानों और किसान संगठनों के कड़े रुख के आगे झुकते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने विवादों में रहे 'गन्ना कंट्रोल ऑर्डर-2026' (Sugarcane Control Order-2026) को पूरी
चंडीगढ़: देश के गन्ना किसानों और किसान संगठनों के कड़े रुख के आगे झुकते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने विवादों में रहे 'गन्ना कंट्रोल ऑर्डर-2026' (Sugarcane Control Order-2026) को पूरी तरह से वापस ले लिया है। इस आदेश के वापस होने से अब किसान अपनी मर्जी के मालिक होंगे और पहले की तरह ही अपने गन्ने को स्थानीय कोल्हू और क्रैशर पर बिना किसी कानूनी अड़चन के बेच सकेंगे। किसानों ने इसे अपनी एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत बताया है।
क्या था विवाद और क्यों हो रहा था विरोध?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए गन्ना कंट्रोल ऑर्डर-2026 के तहत गन्ने की आपूर्ति और उसकी बिक्री को लेकर कुछ कड़े नियम और सीमाएं तय की जा रही थीं। किसान संगठनों और खांडसारी (गुड़) उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप था कि इस नए आदेश से सीधे तौर पर चीनी मिलों (Sugar Mills) को फायदा पहुंच रहा था और किसानों को बंधक बनाने की कोशिश की जा रही थी। इस ऑर्डर के कारण किसान अपने ही गन्ने को खुले बाजार या स्थानीय कोल्हू पर बेचने के लिए स्वतंत्र नहीं रह पा रहे थे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गुड़ उद्योग ठप होने की कगार पर पहुंच गया था।

इस फैसले के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले पारंपरिक कोल्हू और क्रैशर उद्योग पहले की तरह सुचारू रूप से काम कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competition) बनी रहेगी। चीनी मिलों के साथ-साथ जब कोल्हू और क्रैशर भी चालू रहेंगे, तो किसानों को उनके गन्ने का सही समय पर और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी। साथ ही, उन्हें मिलों के बाहर लगने वाली लंबी कतारों और भुगतान में होने वाली देरी से भी बड़ी राहत मिलेगी।