हरियाणा के तहखानों से निकल रहा ज्ञान का खजाना, ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत 27 हजार से ज्यादा पांडुलिपियां डिजिटल दुनिया में दर्ज

Edited By Manisha rana, Updated: 30 May, 2026 01:53 PM

treasure of knowledge is emerging from the basements of haryana

हरियाणा अब अपनी सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को नई डिजिटल पहचान देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी मंदिरों, मठों, निजी संग्रहों और पुराने पुस्तकालयों तक सीमित रही दुर्लभ पांडुलिपियां अब डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बन रही हैं।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा अब अपनी सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को नई डिजिटल पहचान देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी मंदिरों, मठों, निजी संग्रहों और पुराने पुस्तकालयों तक सीमित रही दुर्लभ पांडुलिपियां अब डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बन रही हैं। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत प्रदेश में अब तक 27 हजार 587 पांडुलिपियों को पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है, जिसे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार अब आम लोगों को भी इस मिशन से जोड़ने में जुटी है। प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से अपील की जा रही है कि यदि उनके पास कोई पुरानी पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं तो उनकी जानकारी प्रशासन को दें। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का उद्देश्य देशभर की पांडुलिपि विरासत का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रसार करना है, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा आधुनिक दौर में भी जीवित रह सके।

सिर्फ दस्तावेज नहीं, पीढ़ियों की बौद्धिक विरासत

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को यहां हुई राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण की समीक्षा बैठक में कहा कि यह अभियान केवल पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों में इतिहास, आयुर्वेद, दर्शन, साहित्य और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी अमूल्य जानकारी छिपी हुई है, जिसे संरक्षित करना समय की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को और तेज किया जाए ताकि प्रदेश में बिखरी बहुमूल्य पांडुलिपियों को जल्द से जल्द डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जा सके।

गांवों से पुस्तकालयों तक चल रहा खोज अभियान

बैठक में बताया गया कि पांडुलिपियों की खोज और दस्तावेजीकरण के लिए जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के सहयोग से दुर्लभ दस्तावेजों को खोजा जा रहा है। राज्य सरकार ने इस मिशन के लिए अभिलेखागार विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है। इसके साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्थायी समिति गठित की गई है, जबकि हर जिले में नोडल अधिकारी और जिला स्तरीय समितियां भी बनाई गई हैं ताकि सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाई जा सके।

डिजिटल भंडार बनेगा शोधकर्ताओं के लिए बड़ी ताकत

अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. साकेत कुमार ने कहा कि यह अभियान भविष्य में एक विशाल डिजिटल ज्ञान भंडार तैयार करेगा। इससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्यार्थियों को दुर्लभ पांडुलिपियों तक आसान पहुंच मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग और समन्वय किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पांडुलिपियों को संरक्षित किया जा सके।

कुरुक्षेत्र बना प्रदेश का ‘ज्ञान केंद्र’

ज्ञान भारतम पोर्टल पर सबसे ज्यादा 15 हजार 818 पांडुलिपियां अपलोड कर कुरुक्षेत्र जिले ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। मुख्य सचिव ने इसके लिए जिला प्रशासन की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी इस दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

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