स्टिल्ट प्लस फोर पर हाईकोर्ट का 'हथौड़ा', हरियाणा में नई मंजूरियों पर तत्काल रोक...जानें क्या है कारण

Edited By Isha, Updated: 05 Apr, 2026 05:15 PM

immediate ban on new applications for stilt plus four structures

हरियाणा में रिहायशी प्लॉटों पर स्टिल्ट प्लस फोर (S+4) मंजिल बनाने की नीति पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने के बाद, हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने...

चंडीगढ़: हरियाणा में रिहायशी प्लॉटों पर स्टिल्ट प्लस फोर (S+4) मंजिल बनाने की नीति पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने के बाद, हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी नई मंजूरियों और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

 
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने केवल राजस्व कमाने के लिए आम जनता की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की क्षमता को नजरअंदाज कर दिया है। कोर्ट ने विशेष रूप से गुरुग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सड़कें, सीवरेज और पानी की व्यवस्था पहले ही भारी दबाव में है और बिना 'इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट' के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देना शहर को बर्बादी की कगार पर ले जाना है।

 
हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2026 के आदेश के अनुपालन में, निदेशक (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), शहरी स्थानीय निकाय (ULB) और HSIIDC को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि S+4 के लिए किसी भी नए बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
जिन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, उनकी अगली प्रक्रिया पर भी रोक रहेगी। जब तक हाईकोर्ट का अगला आदेश (8 अप्रैल 2026) नहीं आता, तब तक कोई नया OC जारी नहीं किया जाएगा।


याचिकाकर्ताओं (जिनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक भी शामिल हैं) का आरोप है कि सरकार ने पी. राघवेंद्र राव कमेटी की उन सिफारिशों को दरकिनार कर दिया, जिनमें स्पष्ट कहा गया था कि पुराने सेक्टरों में जहां सड़कें 10-12 मीटर से कम चौड़ी हैं, वहां S+4 की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि कई इलाकों में सड़कें कागजों पर तो चौड़ी हैं, लेकिन अतिक्रमण और खराब प्लानिंग के कारण उनकी वास्तविक चौड़ाई बेहद कम रह गई है। इस रोक के बाद अब सबकी नजरें 8 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। बिल्डरों और प्लॉट मालिकों में इस फैसले से हड़कंप है, वहीं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने इस फैसले का स्वागत किया है।

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