Edited By Manisha rana, Updated: 20 Mar, 2026 09:34 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की अपील को खारिज करते हुए एक कर्मचारी को सभी सेवा लाभ देने के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी को श्रम न्यायालय द्वारा सेवा में निरंतरता के साथ बहाल किया जाता है तो उसे उससे...
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की अपील को खारिज करते हुए एक कर्मचारी को सभी सेवा लाभ देने के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी को श्रम न्यायालय द्वारा सेवा में निरंतरता के साथ बहाल किया जाता है तो उसे उससे जुड़े सभी वित्तीय और पदोन्नति संबंधी लाभ भी दिए जाने चाहिए। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने कहा कि निचली अदालतों के आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है, इसलिए उनमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
मामले के अनुसार कर्मचारी प्रकाश चंद को 10 जुलाई 1975 को कंडक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था, जबकि 10 नवंबर 1983 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। इसके खिलाफ उसने श्रम न्यायालय में याचिका दायर की, जहां 23 जनवरी 1998 को उसे सेवा में बहाल करने और उसकी सेवा को निरंतर मानने का आदेश दिया गया। हालांकि, 1983 से 1987 की अवधि को बिना वेतन अवकाश माना गया। श्रम न्यायालय के आदेश के बाद कर्मचारी को नौकरी पर वापस तो ले लिया गया, लेकिन 10 और 20 वर्ष की सेवा पूरी होने पर मिलने वाले स्टैंडर्ड स्केल का लाभ नहीं दिया गया। इसके चलते कर्मचारी ने सिविल अदालत का रुख किया। हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारी को निरंतर सेवा का लाभ और उससे जुड़े वेतनमान देना पूरी तरह उचित है। अंततः हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नियमित दूसरी अपील खारिज करते हुए निर्देश दिया कि कर्मचारी को उसके सभी सेवा लाभ दिए जाएं।
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