हाई कोर्ट ने बढ़ाया सड़क हादसे का मुआवजा, 16.97 लाख से बढ़ा इतने रुपए कर दिया

Edited By Manisha rana, Updated: 20 Mar, 2026 10:24 AM

high court increases road accident compensation

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को राहत देते हुए मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा किया है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एम.ए.सी.टी.) द्वारा दिए गए 16,97,050 रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 42,18,050 रुपए कर...

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को राहत देते हुए मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा किया है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एम.ए.सी.टी.) द्वारा दिए गए 16,97,050 रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 42,18,050 रुपए कर दिया।

जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित की स्थायी दिव्यांगता, भविष्य की आय पर प्रभाव और जीवनभर की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित मुआवजा देना आवश्यक है। मामले के अनुसार जसपाल सिंह को आदेश दिया गया कि यह राशि पीड़ित को शीघ्र वितरित की जाए। वर्ष 2019 में एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनकी दाहिनी टांग घुटने के ऊपर से काटनी पड़ी। इस दुर्घटना के कारण उनकी कार्य क्षमता पर गहरा असर पड़ा। पहले अधिकरण ने उनकी मासिक आय 12,000 रुपए मानते हुए सीमित मुआवजा निर्धारित किया था, जिसे चुनौती दी गई।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अधिकरण ने भविष्य की आय और कार्यात्मक दिव्यांगता का सही आकलन नहीं किया था। अदालत ने पीड़ित की 75 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता मानते हुए उसकी आय में 25 प्रतिशत की वृद्धि जोड़कर नए सिरे से मुआवजा तय किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल चिकित्सीय दिव्यांगता नहीं, बल्कि व्यक्ति की वास्तविक कार्य क्षमता पर पड़े प्रभाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बीमा कंपनी को दो माह में भुगतान का आदेश
मुआवजे की पुनर्गणना करते हुए अदालत ने दर्द और पीड़ा के लिए 8 लाख रुपए, कृत्रिम पैर के खर्च के लिए 5 लाख रुपए, अटैडेट के लिए 2 लाख रुपए, जीवन की सुविधाओं के नुकसान के लिए 2 लाख रुपए और परिवहन और विशेष आहार के लिए अतिरिक्त राशि प्रदान की। निर्णय में कहा गया कि एक स्वस्थ व्यक्ति का अचानक अपंगता की स्थिति में पहुंचना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में मुआवजा केवल इलाज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जीवनभर की कठिनाइयों को भी शामिल करना चाहिए। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर बढ़ी हुई राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जमा कराए। साथ ही अधिकरण को आदेश दिया गया कि यह राशि पीड़ित को शीघ्र वितरित की जाए।

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