Edited By Krishan Rana, Updated: 05 Apr, 2026 07:12 PM

महिलाओं को संकट की घड़ी में तत्काल मदद, कानूनी सहारा और सुरक्षा देने के लिए बनाए गए
रेवाड़ी (महेंद्र भारती) : महिलाओं को संकट की घड़ी में तत्काल मदद, कानूनी सहारा और सुरक्षा देने के लिए बनाए गए सरकारी वन स्टॉप सेंटर की हकीकत रविवार को सामने आ गई। ट्रॉमा सेंटर के सामने स्थित इस सेंटर में, जहां 24 घंटे 3 से 4 कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य है, वहां पूरे दिन सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड ही ड्यूटी पर मिला, जबकि बाकी पूरा स्टाफ नदारद रहा।
इस लापरवाही का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 9 कर्मचारियों की तैनाती वाले इस सेंटर का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को तत्काल राहत, काउंसलिंग, कानूनी मदद और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। लेकिन रविवार को हालात ऐसे रहे कि पूरा सेंटर सुनसान पड़ा मिला और अंदर सिर्फ खाली कुर्सियां नजर आईं। सुबह से शाम तक खाली रहा सेंटर, मदद के लिए आती महिला कहां जाती। रविवार सुबह से लेकर खबर लिखे जाने तक सेंटर में कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा।
आम दिनों में महिलाओं, उनके परिजनों और अधिकारियों की आवाजाही से सक्रिय रहने वाला यह केंद्र पूरे दिन सन्नाटे में डूबा रहा। यदि इसी दौरान कोई पीड़ित महिला मदद के लिए पहुंचती, तो उसे सिर्फ बंद कमरों और खाली कुर्सियों का सामना करना पड़ता। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्ड ने बताया कि यहां कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी रहती है, लेकिन रविवार को स्टाफ की गैरमौजूदगी के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।
सुरक्षा के दावों की खुली पोल:
महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच इस तरह सरकारी सेंटर का खाली मिलना व्यवस्था की बड़ी पोल खोलता है। जिस केंद्र को आपात स्थिति में महिलाओं का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है, वहीं कर्मचारियों की गैरमौजूदगी ने सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
DPO बोलीं- सोमवार को मांगा जाएगा जवाब
मामले में डीपीओ शालू यादव ने कहा कि सेंटर में सुरक्षा गार्ड सहित चार कर्मचारियों की हर समय मौजूदगी जरूरी है। यदि रविवार को कर्मचारी अनुपस्थित मिले हैं, तो सोमवार को संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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