Edited By Krishan Rana, Updated: 10 Mar, 2026 04:22 PM

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण का कहना है कि कई राज्यों की विधानसभाओं का दौरा किया। उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, केरल सहित 13 राज्यों
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण का कहना है कि कई राज्यों की विधानसभाओं का दौरा किया। उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, केरल सहित 13 राज्यों की विधानसभाओं का अध्ययन किया। इसेक अलावा पटना तथा लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलनों में भी भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता ओम बिरला ने की। हर राज्य में कुछ न कुछ श्रेष्ठ है। कहीं समिति प्रणाली मजबूत है, कहीं डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन उत्कृष्ट है। हम उन श्रेष्ठ परंपराओं को हरियाणा में लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
कल्याण ने कहा कि नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल स्पीकर सम्मेलन में भाग लेने का अवसर मिला। इसके बाद सीपीए सम्मेलन के तहत ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। सिडनी और मेलबर्न की संसदों में डिजिटल कार्यप्रणाली, ई-ऑफिस और मजबूत समिति तंत्र देखने को मिला। हम भी हरियाणा विधानसभा में ई-गवर्नेंस, डिजिटल आर्काइव और क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। मेरा मानना है कि तकनीक से कार्यवाही तेज और पारदर्शी दोनों बनती है।
कल्याण ने कहा कि ‘युवा संसद-2025’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए हम छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं। जब युवा संसदीय परंपराओं को समझेंगे, तभी भविष्य का नेतृत्व तैयार होगा। लोकतंत्र केवल वोट देने तक सीमित नहीं है, यह संवाद और भागीदारी की संस्कृति है।
महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय पर कल्याण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। नीतियों में संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टिकोण आएगा। यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
कल्याण ने कहा कि सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हमारा प्रयास है कि चर्चा केवल औपचारिकता न रहे। कानून बनने से पहले उसकी गुणवत्ता पर गंभीर विमर्श हो। इसके लिए विधायी ड्राफ्टिंग कार्यशालाएं करवाई जा रही हैं। विधायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं ताकि वे आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक मुद्दों पर तथ्यपूर्ण ढंग से बोल सकें। हम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहे हैं। लोकतंत्र की मजबूती विधायिका की मजबूती से ही संभव है।
कल्याण ने कहा कि नई विधानसभा भवन की योजना के लिए हम ऐसी आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से सक्षम नई विधानसभा की परिकल्पना कर रहे हैं, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सके। लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा के अनुरूप भवन निर्माण हमारी प्राथमिकता होगी।परिसीमन राष्ट्रीय प्रक्रिया है। यदि सीटें बढ़ती हैं तो अधोसंरचना का विस्तार आवश्यक होगा। इस दिशा में प्रारंभिक विचार-विमर्श चल रहा है।
कल्याण मानते हैं कि विधानसभा को जनता के प्रति और अधिक जवाबदेह, सहभागी व आधुनिक बनाना का मेरा प्रयास है। समिति प्रणाली को मजबूत करना और शोध आधारित चर्चा को बढ़ावा देना मेरी प्राथमिकताएं हैं। मैं चाहता हूं कि हरियाणा विधानसभा देश की अग्रणी विधानसभाओं में शामिल हो तथा प्रभावी विधायिका के माध्यम से हरियाणा प्रदेश नई ऊँचाइयों को छूते हुए विकसित राष्ट्र के सफर में महत्वपूर्ण योगदान दे।
कल्याण कहते हैं कि विधानसभा को देश की अग्रणी विधायिकाओं में शुमार करना उनका लक्ष्य है।
सदन की कुर्सी सिर्फ ऊंची नहीं होती, वह जिम्मेदारियों का सबसे कठिन आसन भी होती है। करनाल जिले के घरौंडा से लगातार तीसरी बार विधायक बने हरविन्द्र कल्याण जब 2024 में हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए, तो यह केवल राजनीतिक पदोन्नति नहीं थी, यह संसदीय परिपक्वता की परीक्षा भी थी। छात्र राजनीति से लेकर 2004 की लंबी पदयात्रा, 2014 में पहली जीत, हैफेड के चेयरमैन, लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और अब स्पीकर। हर पड़ाव ने उन्हें सत्ता और व्यवस्था के भीतर की कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का अवसर दिया। आज वे सदन को अधिक जवाबदेह, तकनीकी रूप से आधुनिक और शोध आधारित बहसों का मंच बनाने के मिशन पर हैं।
लगातार तीसरी जीत जनता के भरोसे की पुष्टि है। लेकिन अध्यक्ष बनते ही राजनीतिक पहचान पीछे छूट जाती है। अब मैं किसी दल का नहीं, पूरे सदन का हूं। मेरी पहली प्रतिबद्धता निष्पक्षता है। मैं चाहता हूं कि सत्ता और विपक्ष दोनों को बराबर अवसर मिले। बहस तीखी हो सकती है, लेकिन गरिमा नहीं टूटनी चाहिए।
भाजपा की हरियाणा में हैट्रिक पर कल्याण का कहना है कि जनता विकास और स्थिरता चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति के मायने बदले हैं तथा वर्तमान सरकार के दौर में व्यवस्थाएँ बेहतर हुई हैं तथा विकास के साथ-साथ जहां पारदर्शिता बढ़ी है वहीं मेरिट को बढ़ावा मिला है। लोग बहुत जागरुक हैं तथा बारीकी से तुलना करते हैं। मेरा मानना है कि लोगों ने काम के आधार पर समर्थन दिया है।
कल्याण ने अपने जीवन के राजनैतिक सफर पर कहा कि चुनाव हमेशा चुनौतीपूर्ण होते हैं। मुकाबला कड़ा था, लेकिन मुझे जनता के समर्थन और सरकार द्वारा करवाए गए कार्यों पर विश्वास था। जब आप निरंतर लोगों के संपर्क में रह कर कार्य करते हैं, तो जनता का विश्वास भी बना रहता है।
संघर्ष के दौर में राजनीतिक यात्रा के संघर्षपूर्ण दौर का जिक्र करते हुए कल्याण बताते हैं कि वह मेरे जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय है। 18 दिन की पदयात्रा में 104 गांवों में गया, साथियों के साथ गांवों में ही रातें बिताई और करीब 375 किलोमीटर की दूरी तय की। इससे मुझे जमीनी हकीकत समझने का अवसर मिला तथा विधायक बनने के बाद मेरा वो संघर्ष क्षेत्र के विकास को और बेहतर तरीक़े से करने में सार्थक सिद्ध हुआ। राजनीति मेरे लिए हमेशा सेवा का एक माध्यम रहा है।
कांग्रेस से भाजपा में आने पर कल्याण बोले कि हर व्यक्ति अपने अनुभव और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेता है। जब लगा कि मेरी मेहनत को उचित मंच नहीं मिल रहा, तब भाजपा से जुड़ा। नेतृत्व ने मुझ पर विश्वास जताया तथा 2014 में जनता ने मुझे पहली बार विधायक बनाया और उसके बाद लगातार वो विश्वास कायम रखने उन्हें कामयाबी मिली।
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