नकली इंजेक्शन बनाने के मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 20 Apr, 2026 07:50 PM

main accused arrested in fake injection manufacturing case

-चीन से रॉ ड्रग्स मंगाकर इटली की एक कंपनी की दवा मौनजारो-तिर्जेपाटाइड के नकली इंजेक्शन बनाता

गुड़गांव, (ब्यूरो): गुरुग्राम के सेक्टर-62 स्थित एक सोसाइटी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर नकली इंजेक्शन बनाने की एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। टीम अब तक एक मुख्य आरोपी समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी चीन से रॉ ड्रग्स मंगाकर यहां इटली की एक कंपनी की दवा मौनजारो-तिर्जेपाटाइड के नकली इंजेक्शन बना रहा था। यह पूरा रैकेट एक सोसायटी के फ्लैट में चलाया जा रहा था। यही नहीं आरोपी इंडिया मार्ट के माध्यम से इन अवैध इंजेक्शन की सप्लाई करता था।


इस इंजेक्शन का इस्तेमाल वजन घटाने व डायबिटीज के इलाज में किया जाता है। गत शनिवार को टीम ने डीएलएफ फेज-4 में एक गाड़ी से 70 लाख रुपए के इंजेक्शन बरामद किए थे। इसी मामले में जांच करते हुए टीम सोमवार को सेक्टर-62 की सोसाइटी में पहुंची, जहां रॉ ड्रग्स में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार किया जाता था। इसके बाद पैकेजिंग, बारकोड लगाने व लेबलिंग का पूरा काम भी इसी फ्लैट में किया जाता था। टीम ने पैकेजिंग मशीनें भी बरामद की हैं। ड्रग कंट्रोल अधिकारी अमनदीप चौहान ने बताया कि ये इंजेक्शन इटली से इंपोर्ट होकर भारत लाया जाता है। वैसे तो ये शुगर की बीमारी में यूज होता है, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर इसे वजन घटाने के लिए भी लिया जाता है। हमें सूचना मिली थी कि गुरुग्राम में नकली इंजेक्शन की चेन चल रही है। इस सूचना पर हमने रेड की थी।


लैबलिंग में असली इंजेक्शन से मिला अंतर:
पहले डीएलएफ फेज-4 से डिलीवरी करने वाले मुज्जमिल को पकड़ा गया था, अब मुख्य आरोपी अवि शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। मुज्जमिल उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, जबकि अवि गुरुग्राम का निवासी है। आरोपी फ्लैट में ही इन इंजेक्शनों को तैयार कर रहे थे। लेबलिंग में थोड़ा अंतर है, लेकिन आम नागरिक असली और नकली का फर्क नहीं कर सकता। ये इंजेक्शन बिल्कुल हुबहू असली जैसे बनाए जा रहे थे। इस मामले की जानकारी एली लिली कंपनी को भी दी जा रही है।


इंजेक्शनों को लेकर देश भर में अलर्ट जारी:
इस कंपनी के इंजेक्शनों को लेकर पूरे भारत में अलर्ट जारी कर दिया गया है। साथ ही बैच नंबर भी साझा किए गए हैं, ताकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें सतर्क रहें और नकली इंजेक्शनों को पकड़ सकें। पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि नकली इंजेक्शन कहां-कहां सप्लाई किए गए और इस रैकेट में कितने लोग शामिल हैं। हालांकि ड्रग कंट्रोल ऑफिसर अमनदीप चौहान ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में अभी सप्लाई को लेकर खुलासा नही किया है और कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। सप्लाई इंडिया मार्ट के माध्यम से की जा रही थी। ऐसे में कितने इंजेक्शन सप्लाई किए जा चुके हैं यह कहना मुश्किल है।


नकली इंजेक्शन लेना पड़ सकता है भारी:
एक दवा विक्रेता ने बताया कि इस इंजेक्शन को आम लोग भी मोटापा कम करने के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर आरोपियों ने नकली इंजेक्शन बाजार में उतार दिया। इन नकली इंजेक्शन के इस्तेमाल से एलर्जी, चेहरे पर सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय में लीवर की गंभीर बीमारियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक है।

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