Edited By Isha, Updated: 21 Apr, 2026 04:21 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की जानकारी देने में देरी करने पर हरियाणा सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करने और स्कूलों का विस्तृत विवरण पेश न करने के कारण सरकार पर...
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की जानकारी देने में देरी करने पर हरियाणा सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करने और स्कूलों का विस्तृत विवरण पेश न करने के कारण सरकार पर 10,000 रुपये का सांकेतिक जुर्माना ठोंका है।
क्या है पूरा मामला?
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पेयजल, शौचालयों की स्थिति, बिजली और चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अदालत यह जानना चाहती थी कि क्या प्रदेश के बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल रहा है।
कोर्ट की नाराजगी के मुख्य कारण:
सरकार द्वारा पूर्व में पेश किए गए हलफनामों में दी गई जानकारी अधूरी और अस्पष्ट पाई गई। बार-बार समय दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डेटा संकलित करने में विफल रहा। न्यायमूर्ति ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने जुर्माने की राशि जमा करने के साथ-साथ सरकार को एक 'अंतिम अवसर' दिया है। शिक्षा विभाग को अब एक हलफनामा दायर करना होगा जिसमें हर जिले के स्कूलों की सुविधाओं का स्पष्ट ब्यौरा हो। यदि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है, तो अदालत कड़े प्रशासनिक कदम उठा सकती है।