Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Apr, 2026 05:02 PM

आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में उपचार कराने वाले मरीजों को आने वाले दिनों में
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में उपचार कराने वाले मरीजों को आने वाले दिनों में झटका लग सकता है। एक बार फिर से निजी अस्पताल संचालकों और आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की ओर से भुगतान नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की गई है। इसके अलावा सीएम नायब सिंह सैनी, राज्य सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, सेहत मंत्री को पत्र लिखकर उनके सामने पैदा हो रहे हालात के बारे में बताते हुए आने वाले दिनों में उपाचर बंद करने की चेतावनी दी है। प्रधान डा. सोनी और एसोसिएशन के पूर्व प्रधान वरिष्ठ डाक्टर अजय महाजन ने यह भी कहा कि चार पांच माह पहले मुख्य सचिव और सीएम से गुहार के बाद लगभग 230 करोड़ की राशि रिलीज करने की बात हुई है, वो भी अभी तक नहीं मिला है।
काफी पैकेज हुए कम, कुछ निजी अस्पताल संचालकों का सिरेंडर का सुझाव
लगातार आयुष्मान के तहत भुगतान लटकने और लंबे वक्त तक नहीं होने से नाराज काफी अस्पताल संचालक अब इंपैनल्ड सूची से बाहर होने की तैयारी में है। आईएमए के नेता डाक्टर अजय महाजन औऱ डा. सोनी ने बताया कि इस संबंध में काफी ने पत्र लिखकर अपनी इच्छा भी जाहिर कर दी है। पिछली बार भी सरकार के मुख्य सचिव से बातचीत कर और सीएम के हस्तक्षेप के बाद में अफसरों ने 230 करोड़ की राशि रिलीज करने के दावे किए थे। लेकिन यह पैसा भी अभी तक नहीं मिल सका है।
पांच सौ करोड़ की राशि बकाया, 7 अप्रैल को हुई बैठक
आईएमए के पदाधिकारियों में प्रधान डा. सुनीला सोनी और सचिव योगेश जिंदल के अलावा डा. अजय महाजन आईएमएएचबीआई का कहना है कि निजी अस्पताल संचालक आए दिन भुगतान को लेकर बैठकों और आश्वासनों से परेशान हो चुके हैं। अभी तक जहां जनवरी की जारी पेमेंट नहीं मिल सकी है। वहीं अभी भी सितंबर से बकाया भुगतान नहीं मिला है। बीती 7 अप्रैल को ऑनलाइन बैठक में जुड़ने के बाद सभी इंपैनल्ड अस्पतालों में सिरेंडर का फैसला लिया है। एक साथ में सभी इस कदम को उठाएंगे और अध्यक्ष आईएमए को अपने पत्र भेजकर एक साथ सरकार को भेजे जाने का आग्रह करेंगे।
सीईओ को लिखा पत्र
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण सीईओ को पत्र लिखकर उन्हें भी चेतावनी दी है। डॉक्टरों और निजी अस्पतालों ने साफ कर दिया है कि मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे योजना से सामूहिक रूप से बाहर होने के लिए पत्र लिख चुके हैं। नियम अनुसार 15 दिन में भुगतान होना चाहिए लेकिन पांच पांच माह से ज्यादा वक्त के बाद भी नहीं हो रहा है। एसोसिएशन हरियाणा द्वारा भेजे पत्र में कई मुद्दे उठाए गए हैं। सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी होना है। सितंबर 2025 से अब तक करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं. कई बार विभाग की ओर से उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने के बाद भी भुगतान नहीं दिया जा रहा है। आईएमए और स्वास्थ विभाग के बीच समन्वय का अभाव दिखाई दे रहा है।
‘एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटी’ में शामिल नहीं कर रहे
मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद, अभी तक हरियाणा आईएमए अध्यक्ष और प्रतिनिधि को ‘एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटी’ में शामिल नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, कमेटियों की बैठकें भी पिछले पांच माह में नहीं हुई। बीती 7 अप्रैल को हुई बैठक में सूचीबद्ध अस्पतालों ने सर्वसम्मति से सरेंडर लेटर अध्यक्ष को सौंपने और 20 अप्रैल 2026 तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं जारी रखना संभव नहीं होगा। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सोनीला सोनी ने कहा कि "सरकार और प्राधिकरण के साथ संवाद कर रहे हैं, लेकिन अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। आर्थिक दबाव के कारण अस्पतालों के लिए योजना में बने रहना मुश्किल होता जा रहा है।
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