हरियाणा में गंभीर कुपोषण को समाप्त करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना के लिए 170 करोड़ आवंटित

Edited By Manisha rana, Updated: 10 Apr, 2026 12:16 PM

aim to eliminate severe malnutrition in haryana

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में पोषण मिशन को और मजबूत करते हुए वर्ष 2026-27 के दौरान कुपोषण, खास तौर पर गंभीर कुपोषण को लगभग समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा सरकार ने प्रदेश में पोषण मिशन को और मजबूत करते हुए वर्ष 2026-27 के दौरान कुपोषण, खास तौर पर गंभीर कुपोषण को लगभग समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पोषण अभियान के तहत वित्तीय सहायता और कवरेज को बढ़ाते हुए लाखों लाभार्थियों को दैनिक पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना के लिए भी 170 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे राज्य में पोषण संबंधी प्रयासों को और गति मिलेगी।

बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान हासिल उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। प्रदेशभर में लगभग 9.92 लाख लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की गई, जबकि विकास निगरानी कवरेज 99 प्रतिशत से अधिक रहा। निरंतर और लक्षित प्रयासों के परिणामस्वरूप गंभीर कुपोषण के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज राज्य स्तरीय कन्वर्जेंस कमेटी की सातवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में स्थायी सुधार के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा आधारित निगरानी और अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन पहलों के क्रियान्वयन में स्थानीय पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा ग्राम सभा की बैठकों के दौरान जागरूकता अभियान चलाए जाएं। उन्होंने महिला पंचों और सरपंचों को परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में शामिल करने पर भी जोर दिया, ताकि समुदाय की भागीदारी बढ़े और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए। मुख्य सचिव ने आयुष विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर पोषण वाटिकाओं के विकास तथा आंगनवाड़ी केंद्रों पर मासिक योग दिवस आयोजित करने के भी निर्देश दिए। वहीं, बागवानी विभाग को फलों और मौसमी सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए, ताकि पोषण सुधार के प्रयासों को मजबूती मिल सके।

वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में विकास निगरानी कवरेज को 99 प्रतिशत तक बढ़ाने, गंभीर कुपोषण को नगण्य स्तर तक लाने तथा पूरक पोषण सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने, पूरक आहार प्रथाओं में सुधार और तीव्र कुपोषण के लक्षित प्रबंधन पर बल दिया जाएगा। एनीमिया से निपटने के लिए बच्चों, किशोरियों और महिलाओं को आयरन एवं फाॅलिक एसिड की खुराक देने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, ओआरएस और जिंक के माध्यम से दस्त प्रबंधन, टीकाकरण, डिवार्मिंग तथा विटामिन-ए कवरेज का विस्तार कर समग्र बाल स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाएगा।

जमीनी स्तर पर आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, स्वयं सहायता समूहों और पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से विभागीय समन्वय को मजबूत किया जाएगा। आयरन युक्त आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक पहल का भी विस्तार किया जाएगा। साथ ही कम वजन वाले नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल पर भी ध्यान दिया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री शेखर विद्यार्थी ने बताया कि सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए लगभग 15,900 आंगनवाड़ी केंद्रों का विद्युतीकरण किया गया है। सभी जिलों में फोर्टिफाइड तेल और डबल फोर्टिफाइड नमक की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जबकि ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए गए हैं। वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत लगभग 9.46 लाख बच्चों तथा 2.56 लाख गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दैनिक पोषण सहायता प्रदान की जा रही है, जिसमें राज्य की विभिन्न योजनाओं के तहत विविध खाद्य पदार्थ भी शामिल हैं। इसके अलावा, पोषण ट्रैकर के माध्यम से डिजिटल निगरानी और फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू कर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाया गया है।  बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी, मौलिक शिक्षा विभाग की निदेशक मनीता मलिक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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