Edited By Manisha rana, Updated: 10 Apr, 2026 09:55 AM

हरियाणा में निगमों से बिजली हासिल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को झटका लगा है। हरियाणा इलैक्ट्रिसिटी रँगुलेट्री कमीशन (एच.ई. आर.सी.) ने औद्योगिक उपभोक्ताओं की उस मांग को खारिज कर दिया है।
चंडीगढ़ : हरियाणा में निगमों से बिजली हासिल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को झटका लगा है। हरियाणा इलैक्ट्रिसिटी रँगुलेट्री कमीशन (एच.ई. आर.सी.) ने औद्योगिक उपभोक्ताओं की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें इंडस्ट्री से वसूल किए जाने वाले अत्यधिक फिक्स्ड चार्ज को कम करने के लिए कहा गया था।
दरअसल, उपभोक्ताओं की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई गई थी कि औद्योगिक इकाइयों से फिक्स्ड चार्ज काफी अधिक वसूल किया जा रहा है। कुछ मामलों में तो यह चार्ज 290 रुपए के.वी.ए. के हिसाब से जोड़ कर बिल में भेजा जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कम खपत के समय भी ये चार्ज लगते रहते हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है। यही कारण है कि औद्योगिक इकाइयों ने फिक्स्ड चार्ज को कम किए जाने की मांग की थी। इसके साथ ही फिक्स्ड चार्ज को तर्कसंगत बनाया जाने और स्वीकृत लोड के बजाय वास्तविक मांग से जोड़े जाने के लिए कहा गया था।
हालांकि इस मामले में एच.ई.आर.सी. की ओर से बताया गया कि फिक्स्ड चार्ज को सेवा की लागत सिद्धांतों के अनुसार नैटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और रखरखाव जैसे फिक्स्ड खर्चों की वसूली के लिए डिजाइन किया गया है। ये खर्च अनिवार्य प्रकृति के होते हैं और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं इसलिए फिक्स्ड चार्ज में फिलहाल संशोधन नहीं हो सकता।
2015-16 में हुआ था संशोधन
आयोग ने बताया कि का एच.टी. उपभोक्ताओं पर लागू फिक्स्ड चार्ज में आखिरी बार वित्त वर्ष 2015-16 में संशोधन किया गया था और आपूर्ति लागत में लगातार वृद्धि के बावजूद, वे लगभग 7 वर्षों तक अपरिवर्तित रहे। आयोग मानता है कि टैरिफ स्थिरता की लंबी अवधि के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में 3,262 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए एक पुनर्समायोजन की आवश्यकता थी। आयोग ने पाया कि फिक्स्ड चार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर लागतों की वसूली के लिए जरूरी हैं, जो ऊर्जा खपत पर निर्भर नहीं करती।
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