Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 03 Apr, 2026 10:12 PM

डीएलएफ फेज-3 के यू-ब्लॉक में एक पुराने और हरे-भरे पीपल के पेड़ के नीचे कचरा जलाना और विरोध करने पर महिला से बदसलूकी करना एक केयरटेकर को महंगा पड़ गया।
गुड़गांव, (ब्यूरो): डीएलएफ फेज-3 के यू-ब्लॉक में एक पुराने और हरे-भरे पीपल के पेड़ के नीचे कचरा जलाना और विरोध करने पर महिला से बदसलूकी करना एक केयरटेकर को महंगा पड़ गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुग्राम पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की पूर्व प्रोफेसर और वॉक फॉर एनिमल्स एंड हैबिटेट (डब्ल्यूएएच) की अध्यक्ष अमिता सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 30 मार्च 2026 की सुबह करीब साढे आठ बजे एक गेस्ट हाउस का एक कर्मचारी पीपल के पेड़ के ठीक नीचे कूड़ा जला रहा था। आग इतनी तेज थी कि पेड़ की नई कोपलें और पत्तियां झुलसने लगी थीं। जब अमिता सिंह ने उसे रोकने की कोशिश की और आग बुझाने को कहा, तो आरोपी ने न केवल बात मानने से इनकार कर दिया, बल्कि उनके साथ बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आरोपी ने खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बताते हुए धमकी दी कि वह किसी से नहीं डरता।
प्रोफेसर अमिता सिंह ने अपनी लिखित शिकायत में स्पष्ट किया कि खुले में कचरा जलाना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 के तहत एक गंभीर अपराध है। इसके अलावा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और नगर निगम गुरुग्राम ने भी इस पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। डीएलएफ फेज-तीन थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की आगे की तफ्तीश जारी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।