गुरुग्राम के बिल्डर के खिलाफ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा ने दर्ज की एफआईआर

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 27 Mar, 2026 12:49 PM

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गुरुग्राम के एक्सपेरियन डेवलपर्स, एक्सपेरियन कैपिटल और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने ईडी की शिकायत पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में एफआईआर दर्ज की है।

गुड़गांव, (ब्यूरो):गुरुग्राम के एक्सपेरियन डेवलपर्स, एक्सपेरियन कैपिटल और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने ईडी की शिकायत पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में रेलिगेयर फिनवेस्ट के पूर्व प्रमोटरों मलविंदर और शिविंदर मोहन सिंह द्वारा की गई 2036 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा होने के आरोप है। इससे पहले ईडी ने वर्ष 2020 में 9 एकड़ से अधिक जमीन अटैच कर ली थी। ईडी द्वारा की गई जांच में पाया गया कि रेलिगेयर फिनवेस्ट से डाइवर्ट किए गए ₹150 करोड़ का उपयोग गुरुग्राम के सेक्टर-62 में 27.86 एकड़ कीमती जमीन खरीदने के लिए किया गया था।

 

ईडी की दिल्ली जोनल-2 टीम द्वारा शेयर की गई जानकारी के आधार पर दर्ज एफआईआर में डिग्निटी बिल्डकॉन की दिवाला समाधान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। गुरुग्राम में एक्सपेरियन डेवलपर्स के कई रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट हैं। जिसमें सैकड़ों बॉयर्स का पैसा फंसा हुआ है। नई एफआईआर दर्ज होने से बॉयर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिससे बॉयर्स में भी भय का माहौल बना हुआ है। एसपीआर रोड पर भी एक्सपेरियन डेवलपर्स के प्रोजेक्ट हैं, लेकिन कई प्रोजेक्ट पेंडिंग पड़े हुए हैं।

 

ईडी की शिकायत के अनुसार डिग्निटी बिल्डकॉन जब की कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया चल रही थी, तब एक्सपेरियन समूह ने कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर पूरी प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की। जब दिवाला प्रक्रिया पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक लगी हुई थी, उसी दौरान एक्सपेरियन की संबंधित इकाई ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और ब्लैकस्टोन ग्रुप के कर्ज सस्ते में खरीद लिए। इससे एक्सपेरियन के पास लेनदारों की समिति में वोटिंग अधिकार आ गए। ईडी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि एक्सपेरियन द्वारा दिखाए गए 445 करोड़ के भुगतान का एक बड़ा हिस्सा लगभग 334 करोड़ रुपए उसकी अपनी ही संबंधित कंपनियों के पास वापस लौट गया। इससे जमीन हासिल करने की वास्तविक प्रभावी लागत बहुत कम रह गई, जिससे अन्य लेनदारों और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। कुल मिलाकर 630 करोड़ रुपए के हेरफेर का मामला बनता है। इस बारे में ईडी अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और संबंधित समाधान योजना को लेकर कई जगहों पर चुनौती दी गई है। साथ ही अन्य एजेंसियों की जांच भी जारी है।

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