सिविल अस्पताल के बाहर महिला ने दिया बच्‍चे को जन्‍म

Edited By Isha, Updated: 12 Oct, 2019 01:31 PM

woman gives birth to a child outside the civil hospital

पानीपत का सिविल अस्पताल सबसे अधिक डिलीवरी करवाने के मामले में प्रदेश में नंबर-1 और करीब 42 करोड़ की लागत से नई बिल्डिंग बनने के बावजूद भी यहां पर गर्भवतियों को मिलने वाली सुविधा न के........

पानीपत (अनुज) : पानीपत का सिविल अस्पताल सबसे अधिक डिलीवरी करवाने के मामले में प्रदेश में नंबर-1 और करीब 42 करोड़ की लागत से नई बिल्डिंग बनने के बावजूद भी यहां पर गर्भवतियों को मिलने वाली सुविधा न के बराबर है अगर अस्पताल का एक फोन खराब हो जाए तो उसे भी ठीक होने में एक या 2 दिन का समय लग जाता है। वहीं एक फोन कनैक्ट होने पर किसी की जिंदगी बचा सकता है तो कनैक्ट नहीं होने पर एक फोन ही जिंदगी गंवाने का कारण भी बन जाता है।

फोन से जुड़ा हुआ एक मामला पानीपत के सिविल अस्पताल में देखने को मिला। जहां पर परिजनों ने कई बार सिविल अस्पताल के एम्बुलैंस केंद्र में फोन नंबर 108 को 5 बार मिलाने की कोशिश की लेकिन 108 नंबर कई बार मिलाने की कोशिश के बाद जब फोन नहीं मिला तो मजबूर होकर परिजन महिला को ऑटो में सिविल अस्पताल में लेकर पहुंचे, लेकिन अधिक समय बीतने के कारण स्टाफ नर्सों को ऑटो में ही डिलीवरी करवानी पड़ी।

असंध रोड स्थित सौदापुर गांववासी महिला के पति टिक्कू ने आरोप लगाया कि उसने 5 से 6 बार अपने फोन से सिविल अस्पताल के एम्बुलैंस केंद्र पर फोन मिलाया, लेकिन फोन नहीं मिला। फोन से कम्प्यूटरीकृत आवाज आई कि फोन खराब है, कृप्या थोड़ी देर बाद कोशिश करें। हर 5 मिनट में उसने 5 से 6 बार फोन किया, लेकिन नहीं मिला।

वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी को लेबर पेन शुरू हो गए थे। इतने में उसकी मां ने उससे कहा कि जब एम्बुलैंस का नंबर नहीं मिल रहा तो ऑटो ले आए। हम उसी में चले जाएंगे जिसके बाद वह भागकर रोड से ऑटो वाले को घर पर लेकर आया और अपनी पत्नी पूजा व मां को साथ लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा। लेट होने के कारण स्टाफ नर्सों द्वारा सिविल अस्पताल के गेट पर ऑटो में ही उसकी पत्नी की डिलीवरी करवाई गई।

जिसके बाद महिला व बच्चे को डिलीवरी वार्ड में ले जाया गया। जहां पर जच्चा व बच्चा दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं। वहीं बता दें कि 15 दिन में यह दूसरा मामला है। जहां पर ऑटो में स्टाफ नर्सों द्वारा डिलीवरी करवाई गई हो। अस्पताल प्रशासन के इस ढीले रवैये के कारण किसी की जान भी जा सकती है। लेकिन इस ओर सिविल अस्पताल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है। 

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