विदेश में नौकरी के नाम पर हो रही मानव तस्करी, साइबर फ्रॉड में करते थे शामिल, दो गिरफ्तार

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 21 Nov, 2025 03:53 PM

two arrested in case of human trafficking on the name of job

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर मानव तस्करी किए जाने का मामला सामने आया है। विदेश में नौकरी करने की चाह रखने वालों को पहले थाईलैंड भेजा जाता था फिर अवैध रूप से उन्हें दूसरे देशों में भेजकर चीन नागरिकों द्वारा संचालित अवैध कॉल सेंटर के जरिए यूएस...

गुड़गांव, (ब्यूरो): विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर मानव तस्करी किए जाने का मामला सामने आया है। विदेश में नौकरी करने की चाह रखने वालों को पहले थाईलैंड भेजा जाता था फिर अवैध रूप से उन्हें दूसरे देशों में भेजकर चीन नागरिकों द्वारा संचालित अवैध कॉल सेंटर के जरिए यूएस नागरिकों को ठगने के कार्य में लगाया जाता था। म्यांमार और थाईलैंड पुलिस के माध्यम से गुड़गांव पुलिस ने दो आरोपियों को भारत डिपोर्ट कराया और उन्हें एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अब तक हरियाणा और राजस्थान के 10 लोगों को अपने झांसे में ले चुके हैं।

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पुलिस के मुताबिक, 15 नवंबर को एक व्यक्ति ने साइबर थाना साउथ को शिकायत दी थी कि इसकी मुलाकात एक सोनू नाम के लड़के से गुरुग्राम में हुई थी, सोनू ने इसको बताया कि उसका (सोनू) भाई विदेश (थाईलैंड) में नौकरी दिलाने का काम करता है। ऐसे में उसने सोनू पर विश्वास करते हुए उसे टिकट के 50 हजार रुपए दे दिए। सोनू ने इसे 23 मार्च को जयपुर से थाईलैंड की टिकट दी। थाईलैंड पहुंचने पर सोनू का भाई जितेन्द्र इसे मिला जिसने इससे 1000 थाई करेंसी ले ली व इसको गाड़ी में बैठाकर अवैध तरीके से म्यांमार बॉर्डर ले गया, जहां पर इसको डाटा ऑपरेटर की जॉब दिलाई। यह यूएस के लोगों का डेटा अवैध तरीके से जुटाने का काम करने लगा। जब इसने सोनू को बताया कि यह तो अवैध तरीका है मुझे थाईलैंड के नाम पर म्यांमार क्यों भेज दिया तो सोनू ने इसे जान से मारने की धमकी दी। 22 अक्टूबर को इसे म्यांमार की सेना ने पकड़ लिया और इसे म्यांमार पुलिस के हवाले कर दिया। 6 नवंबर को इसे थाईलैंड से दिल्ली डिपोर्ट किया गया। इस शिकायत पर साइबर थाना वेस्ट पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

 

मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को वजीराबाद पुलिस एकेडमी दिल्ली से काबू किया जिनकी पहचान भिवानी के गांव बडवा निवासी विजेंद्र उर्फ सोनू (23) व जितेंद्र उर्फ मोनू (21) के रूप में हुई। आरोपियों से पूछताछ में ज्ञात हुआ कि जितेन्द्र उर्फ मोनू जनवरी-2025 को म्यांमार गया था जहां ये चाईना मूल के लोगों से मिला और ये उनके साथ मिलकर साइबर फ्रॉड के काम करने लगा। इसने अपने भाई विजेंद्र उर्फ सोनू को बताया कि यहां चाईनीज लोग अवैध तरीके के काम/ठगी के लिए लड़के बुलाते हैं और कमीशन के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के बदले 1000 डॉलर कमीशन देते हैं तथा एजेंट को 3000 डॉलर देते हैं। आरोपी विजेंद्र उर्फ सोनू ने शिकायतकर्ता मंदीप को अपने भाई आरोपी जितेन्द्र के कहने पर थाईलैंड भेजा व वहां से म्यांमार भेजा था, जिसके बदले आरोपी विजेंद्र को 3000 डॉलर व आरोपी जितेन्द्र उर्फ मोनू को 1000 डॉलर का कमीशन मिला था। विजेंद्र उर्फ सोनू ने बताया कि इसके भाई जितेन्द्र के कहने पर यह सितम्बर-2025 में म्यांमार गया था। 21 अक्टूबर को म्यांमार आर्मी ने इन दोनों को पकड़ लिया और 19 नवंबर को इन्हें दिल्ली डिपोर्ट किया गया। 

 

मामले की जांच में सामने आया कि ये आरोपी उपरोक्त तरीके से मानव तस्करी करने, नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी के लिए युवाओं को विदेश भेजने तथा विदेश ले जाकर उन्हें किसी अन्य देश ले जाकर उन्हें जान से मारने की धमकी देकर अवैध कार्य कराने की वारदातों को अंजाम देते थे। इसके बदले ये अपने चाईना मूल के साथियों से मोटा कमीशन प्राप्त करते थे। ये अब तक हरियाणा व राजस्थान के करीब 10 युवाओं को उपरोक्त तरीके से नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने की वारदातों को अंजाम देने में संलिप्त रहे है। आरोपियों को आज अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। आरोपियों से रिमांड के दौरान उनके साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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