Edited By Isha, Updated: 04 Oct, 2026 11:43 AM

एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम के स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही कुराड़ गांव के खिलाड़ी सुमित कुमार के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। सुमित के भाई जयसिंह ने बताया कि सोनीपत के तीनों खिलाडिय़ों ने शानदार प्रदर्शन किया और पूरे भारतीय दल ने
सोनीपत (सुशील मोर): एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम के स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही कुराड़ गांव के खिलाड़ी सुमित कुमार के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। सुमित के भाई जयसिंह ने बताया कि सोनीपत के तीनों खिलाडिय़ों ने शानदार प्रदर्शन किया और पूरे भारतीय दल ने एकजुट होकर खेल दिखाया। पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले से पहले सुमित से बात हुई थी। तब उसने कहा था, "भाई, पूरी टीम सोना जीतण जाण लाग री।" परिवार ने उसे सोनीपत से आशीर्वाद देकर रवाना किया था और खिलाडिय़ों ने उनकी उम्मीदों पर खरा उतरकर देश का मान बढ़ाया।
भाई जयसिंह ने बताया कि सुमित ने पहले भी ओलंपिक में दो बार कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उसने परिवार की खुशी दोगुनी कर दी है। सुमित की भाभी ज्योति ने कहा कि देवर ने फोन पर कहा था कि इस बार सोना लेकर आएंगे और उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिखाया। उनके लौटने पर परिवार की ओर से शानदार स्वागत किया जाएगा।
कुराड़ गांव के सामान्य परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पहचान बनाने वाले सुमित कुमार का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि हॉकी के जूते और खेल सामग्री खरीदना भी आसान नहीं था। सुमित के बड़े भाई अमित उन्हे जूते दिलाने का लालच देकर मैदान पर हॉकी खेलने के लिए लेकर गए। गांव में प्रशिक्षक मास्टर नरेश ने उसकी प्रतिभा को पहचान लिया और हॉकी स्टिक व जूते उपलब्ध कराए।इसके बाद सुमित ने खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए उसके बड़े भाई अमित और जयसिंह ने दिहाड़ी तक की, ताकि सुमित बिना किसी आर्थिक चिंता के अभ्यास जारी रख सके। बाद में साई में प्रशिक्षक नरेंद्र गौतम ने भी उसकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुमित कुमार लगातार दो ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके शानदार खेल प्रदर्शन के लिए वर्ष 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। सुमित ने जूनियर विश्व कप और सुल्तान जौहर कप में स्वर्ण पदक सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। सुल्तान अजलान शाह कप, एशिया कप और एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताओं में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। परिवार के अनुसार, वह अब तक कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं।सुमित के भाई जयसिंह ने भावुक होते हुए बताया कि सुमित का अपनी मां से बहुत गहरा लगाव था। वर्ष 2021 में टोक्यो ओलंपिक से करीब छह महीने पहले उनकी मां का निधन हो गया था। मां की याद को अपने साथ रखने के लिए सुमित ने उनके झुमके से एक लॉकेट बनवाया, जिसमें मां की तस्वीर लगाई गई। जयसिंह के अनुसार, सुमित ने टोक्यो ओलंपिक के दौरान भी मां का लॉकेट अपने पास मंगवाया था। इसके बाद वह महत्वपूर्ण मुकाबलों में इसे पहनकर मैदान पर उतरता रहा। परिवार का मानना है कि मां की याद से उसे मुश्किल मुकाबलों में भी हौसला मिलता है।
सुमित की भाभी ज्योति ने कहा कि अब घर लौटने का इंतजार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुमित के घर और गांव में जश्न का माहौल है। परिवार और ग्रामीणों को उसके लौटने का इंतजार है। भाई जयसिंह ने कहा कि सुमित समेत सोनीपत के तीनों खिलाडिय़ों ने जिले का नाम रोशन किया है। पूरे देश को भारतीय टीम की इस उपलब्धि पर गर्व है।