महिला टीम की पूर्व कप्तान मां ने दिया था जीत का मंत्र; बेटे ने मैदान पर कमाल दिखाकर देश की झोली में डाला स्वर्ण पदक

Edited By Isha, Updated: 04 Oct, 2026 08:45 AM

pritam siwach s son yashdeep also wins gold double celebration for the family

एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी की दोहरी स्वर्णिम कामयाबी ने सोनीपत के सिवाच परिवार की खुशियां दोगुनी कर दी हैं। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच की खुशी उस वक्त और बढ़ गई, जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी

सोनीपत (सुशील‌ मोर):  एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी की दोहरी स्वर्णिम कामयाबी ने सोनीपत के सिवाच परिवार की खुशियां दोगुनी कर दी हैं। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच की खुशी उस वक्त और बढ़ गई, जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खास बात यह है कि पुरुष टीम की इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा प्रीतम सिवाच के बेटे यशदीप सिवाच भी रहे। महिला टीम की जीत के बाद अब बेटे की टीम के गोल्ड जीतने से परिवार में जश्न का माहौल है।

प्रीतम सिवाच ने बताया कि पुरुष टीम के मुकाबले से पहले उनकी बेटे यशदीप से बातचीत हुई थी। उन्होंने बेटे से कहा था कि सभी खिलाड़ी एकजुट होकर खेलें और टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। मां की यह बात जैसे ही यशदीप और पूरी टीम ने मैदान पर उतारी, भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित कर दिया।यशदीप का हॉकी से जुड़ाव बचपन से ही रहा। घर में हॉकी का माहौल होने के कारण वह अपनी मां के साथ मैदान पर जाता था और खिलाड़ियों को अभ्यास करते देखता था। नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उसने हॉकी स्टिक थामी और इसके बाद इसी खेल को अपना लक्ष्य बना लिया।

मेहनत और लगातार प्रदर्शन के दम पर वह राष्ट्रीय शिविर तक पहुंचा और फिर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई।यशदीप करीब छह वर्षों से भारतीय टीम का हिस्सा हैं। वह विश्व कप के अलावा जूनियर एशियन गेम्स और जूनियर विश्व कप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने परिवार और सोनीपत की हॉकी परंपरा को एक और बड़ी उपलब्धि दी है।

 यशदीप की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका पूरा परिवार हॉकी से जुड़ा रहा है। उनके पिता कुलदीप सिवाच भी भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं। बाद में उन्होंने खेल से जुड़े रहते हुए प्रशिक्षण को अपना क्षेत्र बनाया। वहीं प्रीतम सिवाच भारतीय महिला टीम की कप्तान रह चुकी हैं और लंबे समय तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देती रही हैं। ऐसे में यशदीप का भारतीय टीम तक पहुंचना परिवार की हॉकी विरासत की अगली कड़ी माना जा रहा है।कुलदीप सिवाच ने कहा कि हॉकी उनके परिवार के लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। बेटे और बेटियों की जीत से परिवार के साथ-साथ पूरे हॉकी जगत में खुशी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय महिला और पुरुष दोनों टीमों ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है।एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के साथ भारतीय टीम ने ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। अब परिवार को उम्मीद है कि यशदीप और भारतीय टीम के खिलाड़ी ओलंपिक में भी शानदार प्रदर्शन करेंगे। कुलदीप सिवाच ने बताया कि एशियन गेम्स से लौटने वाले खिलाड़ियों का प्रीतम सिवाच अकादमी में भव्य स्वागत किया जाएगा।

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