Edited By Harman, Updated: 03 Oct, 2026 12:44 PM

एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा सोनीपत की शिल्पी डबास भी रहीं। बेटी की इस उपलब्धि से पिनाना गांव स्थित उनके घर में जश्न का माहौल है।
सोनीपत (सुशील मोर) : एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा सोनीपत की शिल्पी डबास भी रहीं। बेटी की इस उपलब्धि से पिनाना गांव स्थित उनके घर में जश्न का माहौल है। शिल्पी की मां अनीता ने बताया कि एशियाई खेलों में जब भी भारतीय टीम का मुकाबला होता था, वह मैच देखने के बजाय भगवान के सामने बैठकर भारत की जीत की प्रार्थना करती थीं। अब बेटी के स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।
शिल्पी डबास का हॉकी से रिश्ता बचपन से ही जुड़ गया था। परिवार जब चंडीगढ़ में रहता था, उस समय उनके पिता अनिल डबास हॉकी खेलते थे, जबकि मां अनीता भी राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी रही हैं। माता-पिता को मैदान पर हॉकी खेलते देखकर शिल्पी के मन में भी इस खेल के प्रति जुनून पैदा हुआ। छठी कक्षा में उन्होंने पहली बार हॉकी स्टिक थामी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेहनत और लगन के दम पर शिल्पी ने धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
शिल्पी के पिता अनिल डबास भी राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। खेल प्रदर्शन के आधार पर उन्हें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में नौकरी मिली और अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पिता बताते हैं कि शिल्पी में बचपन से ही हॉकी को लेकर जुनून था। वह तड़के चार बजे उठकर मैदान में अभ्यास करने पहुंच जाती थीं। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय जूनियर प्रतियोगिता से उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन शुरू किया और इसके बाद कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार खेल दिखाया। वर्ष 2021 की राष्ट्रीय जूनियर हॉकी प्रतियोगिता में शिल्पी को प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। वह जूनियर भारतीय हॉकी शिविर का भी हिस्सा रह चुकी हैं। अब महिला हॉकी लीग में शराची रार बंगाल टाइगर्स ने उन्हें दो लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया है।
पिनाना गांव निवासी शिल्पी के मामा आशीष मलिक ने बताया कि भारतीय टीम का मुकाबला देखते हुए पूरा परिवार रोमांचित था। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ रहा था, परिवार की धड़कनें भी बढ़ रही थीं और भारत की जीत के साथ खुशी का माहौल छा गया। उन्होंने बताया कि उनकी बहन अनीता और बहनोई अनिल दोनों हॉकी खेलते थे। माता-पिता को हॉकी खेलते देखकर उनके बेटे और बेटी ने भी इसी खेल को अपनाया। आज शिल्पी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर परिवार और सोनीपत का नाम रोशन किया है, जिस पर पूरे परिवार को गर्व है।