हजार वर्षों की आस्था का प्रतीक सोमनाथ:नायब सिंह सैनी

Edited By Isha, Updated: 08 May, 2026 07:49 PM

somnath a symbol of a thousand years of faith  nayab singh sain

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  ने कहा कि भारतीय समाज हमारी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का अटूट संगम है। हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को और मजबूत

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी ):  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  ने कहा कि भारतीय समाज हमारी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का अटूट संगम है। हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को और मजबूत करता है। गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। यह गौरव का पल है कि सोमनाथ मंदिर के संदर्भ में आज मैं अपने विचार सांझा कर रहा हूं। 
 
ने कहा कि भारत सरकार के नेतृत्व में हरियाणा सरकार इस पावन कार्य में अपना सहयोग दे रही है, जैसा कि भारत सरकार 8 मई से 11 मई, 2026 तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रुप में मना रही है, जोकि सोमनाथ मंदिर पर हुये पहले आक्रमण के 1000 वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का एक अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ जो भारत के सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक बना। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आये परन्तु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक था और रहेगा।
 
 यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है जो सोमनाथ पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डट कर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फेल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दूर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवम्बर, 1947 को दिवाली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था "इस (गुजराती) इस नव वर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ पर हमारा पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी। उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। श्री नरेंद्र मोदी, श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। सोमनाथ मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर प्रबंध, और सांस्कृतिक गतिविधियों का सशक्तिकरण निरंतर किया जा रहा है, जिससे यह पवित्र धाम आज आस्था के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।

 
ने कहा कि  माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात करके हिन्दू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है, उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है, साथ ही, उनकी पारम्परिक पहचान को भी बरकरार रखा है। जिसका साक्षात परिणाम है कि देश-विदेश के श्रद्धालु जिसमें बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी भी इन धार्मिक स्थलों का दर्शन करने उमड़ रही है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिन्दू धर्म को पुनर्जीवित किया है जिससे अभिभूत होकर दुनियाभर के भारतीय अपनी जड़ों की ओर पुनः लौट रहे हैं तथा हिन्दू धर्म के महत्व को समझ रहे हैं ।

 
ने कहा कि श्री नरेंद मोदी जी का यही देश प्रेम का भाव हमें सदैव प्रेरित करता है। श्री नरेंद्र मोदी जी ने आह्वान किया है कि सोमनाथ के दर्शन करने से हमें उस अपराजित आत्मा का अनुभव होगा जिसने हर आघात के बावजूद अपनी पहचान और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखा। हमारी संस्कृति इतनी समृद्ध और जीवंत है कि आज भारत विश्व शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको एक अविस्मरणीय अनुभूति होगी।


 

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