Edited By Harman, Updated: 12 Oct, 2026 08:41 AM

हरियाणा सरकार ने नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक परियोजनाओं को अनुमति देने की प्रक्रिया सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार ने नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक परियोजनाओं को अनुमति देने की प्रक्रिया सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब निर्धारित शर्तों के तहत औद्योगिक प्रयोजन के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के माध्यम से प्राप्त अनुमति को निदेशक की ओर से जारी अनुमति के बराबर माना जाएगा। हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ लेने वाले आवेदकों को दी गई जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करनी होगी। गलत तथ्य प्रस्तुत करने, झूठा बयान देने या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने पर अनुमति शुरू से ही शून्य मानी जाएगी।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से 6 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के माध्यम से पंजाब अनुसूचित सड़क एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 में हरियाणा के लिए संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना और स्व-प्रमाणन के आधार पर आवेदन की व्यवस्था को स्पष्ट करना है।
स्व-प्रमाणन से सरल होगी अनुमति प्रक्रिया
संशोधित नियमों में औद्योगिक प्रयोजन के लिए स्व-प्रमाणन को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत आवेदक को निर्धारित जानकारी, आवश्यक दस्तावेज और संबंधित वचनबद्धता स्वयं प्रमाणित करके ऑनलाइन प्रस्तुत करनी होगी। नियम 26ए में किए गए बदलाव के अनुसार औद्योगिक प्रयोजन के लिए स्व-प्रमाणन के माध्यम से प्रस्तुत जानकारी को इसी नियम के तहत आवेदन माना जाएगा।
ऐसे आवेदनों पर नियम 26बी, 26सी और 26डी के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही नियम 26ई में संशोधन कर स्पष्ट किया गया है कि औद्योगिक प्रयोजन के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के आधार पर जारी अनुमति को निदेशक की ओर से प्रदान की गई अनुमति के समान माना जाएगा।
विकास योजना के अनुरूप होना जरूरी
संशोधन में ‘अनुरूप उपयोग’, ‘अनुरूप क्षेत्र’ और ‘स्व-प्रमाणन’ जैसे शब्दों को भी परिभाषित किया गया है। अनुरूप उपयोग का अर्थ नियंत्रित क्षेत्र में भूमि या भवन का ऐसा इस्तेमाल है, जो संबंधित विकास योजना में निर्धारित प्रमुख भूमि उपयोग के अनुरूप हो। इसी प्रकार, अनुरूप क्षेत्र वह क्षेत्र होगा, जहां विकास योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित गतिविधियों की अनुमति होगी। स्व-प्रमाणन के अंतर्गत आवेदक को आवश्यक तथ्यों और दस्तावेजों की सत्यता की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी।
गलत तथ्यों पर शुरुआत से अमान्य होगी अनुमति
सरकार ने स्व-प्रमाणन के साथ जवाबदेही का प्रावधान भी किया है। यदि औद्योगिक परियोजना के लिए अनुमति झूठे बयान, गलत जानकारी या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाकर प्राप्त की जाती है, तो उसे शुरुआत से ही शून्य माना जाएगा। ऐसी अनुमति का प्रभाव जारी होने की तारीख से ही समाप्त माना जाएगा। इस प्रावधान के तहत आवेदक के लिए सही जानकारी देना और निर्धारित शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। इससे स्व-प्रमाणन की सुविधा का इस्तेमाल करते समय तथ्यों की सत्यता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो गई है।
अन्य मामलों में लागू रहेंगी निर्धारित शर्तें
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि औद्योगिक प्रयोजन के लिए स्व-प्रमाणन से संबंधित व्यवस्था अलग है। अन्य प्रयोजनों के मामलों में निदेशक की ओर से निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद ही अनुमति प्रदान की जाएगी।
हरियाणा सरकार के नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल की ओर से जारी यह अधिसूचना नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक परियोजनाओं की अनुमति प्रक्रिया से संबंधित नियमों में बदलाव को औपचारिक रूप देती है।