हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के लोन-एडवांस के नियम सख्त, 24 जानकारियां देना अनिवार्य; लापरवाही पर अधिकारी की तय होगी जवाबदेही

Edited By Harman, Updated: 13 Oct, 2026 09:45 AM

loan advance rules for government employees in haryana are strict

हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को विभागीय ऋण और अग्रिम राशि लेने के लिए अब निर्धारित 24 प्रकार की जानकारियां देना अनिवार्य होगा।

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को विभागीय ऋण और अग्रिम राशि लेने के लिए अब निर्धारित 24 प्रकार की जानकारियां देना अनिवार्य होगा। वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने और ऋण संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से प्रदेश के वित्त विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत ऋण या एडवांस की स्वीकृति के आदेश में सभी आवश्यक विवरण दर्ज करने होंगे। निर्धारित जानकारी के अभाव में राशि जारी करने पर संबंधित स्वीकृति अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वित्त विभाग को विभिन्न सरकारी विभागों में कर्मचारियों को ऋण और अग्रिम राशि स्वीकृत करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें मिली थीं। स्वीकृति आदेशों में आवश्यक विवरण दर्ज नहीं होने के कारण प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय को कर्मचारियों के ऋण का रिकॉर्ड रखने और उसका हिसाब-किताब व्यवस्थित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, उपायुक्तों, एसडीएम तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि कर्मचारियों के ऋण और अग्रिम राशि से संबंधित स्वीकृति आदेशों में निर्धारित सभी जानकारियां अनिवार्य रूप से शामिल की जाएं।

कर्मचारी की व्यक्तिगत और सेवा संबंधी जानकारी भी जरूरी
नई व्यवस्था के तहत स्वीकृति आदेश में कर्मचारी का नाम, पिता या पति का नाम, पदनाम, पे-लेवल अथवा यूनिक कोड, जीपीएफ या यूएएन नंबर और स्थायी पता दर्ज करना होगा। इसके अलावा कर्मचारी का मोबाइल नंबर, नियुक्ति की तारीख, सेवानिवृत्ति की तारीख और मूल वेतन यानी बेसिक-पे का विवरण भी देना अनिवार्य होगा। विभागों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कर्मचारी को किस श्रेणी का ऋण या अग्रिम दिया जा रहा है। इसमें हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए), वाहन, साइकिल, कंप्यूटर और विवाह अग्रिम जैसी श्रेणियां शामिल हैं। यदि अग्रिम राशि किस्तों में जारी की जा रही है तो पहले जारी की गई किस्तों की संख्या और वर्तमान में स्वीकृत की जा रही किस्त का विवरण भी आदेश में दर्ज करना होगा।

राशि, ब्याज और वसूली का पूरा हिसाब देना होगा
वित्त विभाग ने ऋण या एडवांस की वित्तीय शर्तों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत राशि देने का उद्देश्य, कुल स्वीकृत रकम, लागू ब्याज दर, मूलधन की वसूली की अवधि और हर महीने मूलधन के रूप में वसूली जाने वाली राशि का उल्लेख करना होगा। इसके साथ ही ब्याज की वसूली की अवधि और मासिक ब्याज की किस्त का विवरण भी देना जरूरी होगा। स्वीकृति आदेश में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऋण की मंजूरी कितनी अवधि के लिए वैध है। संबंधित बजट हेड और जिस ट्रेजरी से राशि निकाली जानी है, उसकी जानकारी भी दर्ज करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऋण पर लागू ब्याज दर वित्त विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप ही निर्धारित की जाएगी। इससे ऋण स्वीकृति की शर्तों, भुगतान और वसूली से संबंधित जानकारी एक ही आदेश में उपलब्ध रहेगी।

अधिकारियों की जवाबदेही होगी तय
वित्त विभाग की नई व्यवस्था का उद्देश्य ऋण और अग्रिम राशि जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा रिकॉर्ड संबंधी कमियों को दूर करना है। निर्धारित विवरण उपलब्ध होने से संबंधित कर्मचारी के ऋण, स्वीकृत राशि, किस्तों और वसूली की स्थिति का रिकॉर्ड रखने में भी सुविधा होगी। वित्त विभाग ने निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। यदि निर्धारित जानकारियों के बिना ऋण या अग्रिम राशि स्वीकृत की जाती है, तो आदेश पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे विभागीय ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और वित्तीय रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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