सीरियल किलर की गिरफ्तारी के लिए किया था प्रदर्शन, कोर्ट ने किया बरी

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 01 Oct, 2025 09:32 PM

protested for the arrest of serial killer court acquitted

साल 2014 से गुड़गांव में एक ही पैटर्न से हो रही नाबालिग से रेप और हत्या की घटनाओं को ले कर हुए प्रदर्शन और पुलिस झड़प के मामले में सुनवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): साल 2014 से गुड़गांव में एक ही पैटर्न से हो रही नाबालिग से रेप और हत्या की घटनाओं को ले कर हुए प्रदर्शन और पुलिस झड़प के मामले में सुनवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। आरोपियों की वकील ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण कोर्ट ने उन्हें बरी किया है।

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जानकारी के मुताबिक, गुड़गांव में साल 2014 से 2016 तक नाबालिग बच्चियों से रेप के बाद हत्या करने के लगातार एक दर्जन से भी अधिक मामले सामने आए थे। इन घटनाओं को लेकर सामाजिक कार्याकर्ताओं और पीड़ित परिवारों में रोष व्याप्त था जिन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाया था। पुलिस की लापरवाही के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे थे और उन्होंने 16 दिसंबर 2016 में गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर कार्यलय पर जाने का प्रयास किया था, जिन्हें पुलिस ने फव्वारा चौक पर रोक दिया गया था। इस दौरान करीब 1000 लोगों की भीड़ ने पूरा चौक जाम कर दिया था और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। लोगों को सड़कों से हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। लाठीचार्ज का विरोध करने के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प भी हुई थी जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हो गए थे। इस प्रदर्शन में पुलिस ने 9 सामाजिक कार्यकर्ताओं ऋतुराज, राजीव मित्तल, संजय ठकराल, सत्य प्रताप, कुमार धनराज, सोनिया, माही शर्मा, राजबाला, सुषमा त्यागी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इन पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाने के साथ ही कई अन्य धाराएं भी लगाई गई थी। 

 

सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस की कार्यवाही के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के बाद साल 2018 में पुलिस ने नाबालिग से रेप करने के मामले में एक आरोपी सुनील को गिरफ्तार किया था। इस वारदात को भी पहले हुई एक दर्जन वारदातों की तर्ज पर ही अंजाम दिया गया था। जब पुलिस ने आरोपी सुनील से पूछताछ की तो उसने गुड़गांव में 14 वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया था। उसने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि उसने नाबालिगों से रेप करके उनकी हत्या कर दी थी ताकि उसके खिलाफ कोई सबूत न रहे। नाबालिगों से रेप और हत्या मामले की अदालत में पैरवी एडवोकेट डॉ अंजू रावत नेगी ने की थी। मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज ने जो अदालत में सबूत व गवाह पेश किए थे उससे आरोपी पर लगे आरोप साबित हो गए थे जिस पर अदालत ने सीरियल किलर सुनील को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। फांसी की सजा की अपील दायर करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से सीरियल किलर को कोई राहत नहीं मिली थी। वहीं, मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो करीब 15 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीरियल किलर की सजा को होल्ड पर डाल दिया और गुड़गांव कोर्ट और पुलिस को मामले की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। 

 

वहीं, मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों में से उक्त 9 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मामला अदालत में चला। यहां सामाजिक कार्यकर्ताओं की वकील एडवोकेट सीमा शर्मा ने केस की पैरवी की। कोर्ट में पुलिस इन सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाई जिस पर अदालत ने इन सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं, एडवोकेट सीमा शर्मा ने कहा कि 14 बच्चियों की हत्या करने वाले सीरियल किलर की सजा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा होल्ड पर डालना कही न कही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस केस में गुड़गांव पुलिस की कई कमियां रही हैं अन्यथा अब तक दोषी को फांसी हो जाती। 

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