देशवासियों के लिए मिसाल बनी गुड़गांव पुलिस, ये उठाया बड़ा कदम

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 03 Mar, 2026 03:37 PM

police auction a car of rape accuse to compensate victim

गुड़गांव पुलिस ने एक ऐसा काम कर दिया जिससे वह अब देशवासियों में मिसाल के तौर पर जाना जाएगा। पुलिस ने नए भारतीय न्याय संहिता कानून के तहत एक पीड़ित को केस का डिसीजन होने से पहले बड़ी राहत दिलाई है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): गुड़गांव पुलिस ने एक ऐसा काम कर दिया जिससे वह अब देशवासियों में मिसाल के तौर पर जाना जाएगा। पुलिस ने नए भारतीय न्याय संहिता कानून के तहत एक पीड़ित को केस का डिसीजन होने से पहले बड़ी राहत दिलाई है। नए कानून के तहत यह पहला बड़ा मामला है जिस पर गुड़गांव पुलिस के अधिकारियों ने कार्रवाई की और केस में आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश होने तक पीड़ित को बड़ी राहत दिलाई है। वहीं, पुलिस अधिकारियों की मानें तो इस कार्रवाई के तहत आरोपी पर लगे आरोप भी करीब 90 प्रतिशत तक साबित हो गए हैं क्योंकि कार्रवाई के दौरान 90 प्रतिशत जुर्म आरोपी ने अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष कबूल लिया है।

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दरअसल, इसी जाल जनवरी माह में सेक्टर-10 थाना पुलिस को एक युवती ने शिकायत देकर केस दर्ज कराया था कि उसके प्रेमी ने उसे शादी का झांसा देकर काफी लंबे समय पर रेप किया। इतना ही नहीं आरोपी ने उसे ब्लैकमेल कर व अलग-अलग बहाने बनाकर करीब 18 लाख रुपए ट्रांसफर कराए। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल आरोपी को गिरफ्तार किया बल्कि आरोपी से एक गाड़ी भी बरामद की जिसे उसने पीड़िता द्वारा दिए गए रुपयों से खरीदा था। 

 

एसीपी वेस्ट अभिलक्ष जोशी ने बताया कि मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने न केवल उसकी गाड़ी को बल्कि आरोपी के बैंक खातों व अन्य प्रॉपर्टी को भी केस में अटैच कराया। आरोपी को अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहां आरोपी के बैंक खातों की ट्रांजेक्शन व गाड़ी खरीदने के लिए दी गई पेमेंट का मिलान कर बयान दर्ज कराए गए जिसमें आरोपी ने यह रुपए पीड़िता से लेना कबूल लिया और इन्हीें रुपयों के जरिए यह गाड़ी खरीदने की बात कही जिसके बाद इस गाड़ी को नीलाम कर इससे मिली करीब साढ़े 10 लाख रुपए की राशि को मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता को दिलाई गई। वहीं, आरोपी द्वारा पीड़िता से ली गई ज्वेलरी को भी बरामद कर पीड़िता को वापस दिलाया गया। 

 

एसीपी अभिलक्ष जोशी की मानें तो अब तक केस में पुलिस द्वारा प्रॉपर्टी को अटैच किया जाता था। अगर कोई प्रॉपर्टी को नीलाम करना और पीड़ित को मुआवजा देने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का सहारा लेना पड़ता था। अब देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि प्रॉपर्टी को अटैच करने से लेकर नीलामी प्रक्रिया और पीड़ित को मुआवजा दिलाने तक की प्रक्रिया पुलिस ने ही पूरी की है। यह भी 3 महीने से भी कम समय में पूरी कर ली है जिससे लोगों को राहत मिलेगी।

 

उन्होंने बताया कि इससे पहले वह नए कानून के तहत एक आरोपी के मोबाइल को केस से अटैच करा चुके हैं, लेकिन उसमें नीलामी प्रक्रिया नहीं हो पाई,लेकिन यह पहला मामला है जिसमें प्रक्रिया काे पूरा कर लिया गया है। इससे खास तौर पर उन लोगों को फायदा मिलेगा जिनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इस तरह के केसों में आरोपी तो गिरफ्तार हो जाते थे,लेकिन पीड़ितों को उनकी रकम अथवा प्रॉपर्टी वापस नहीं मिल पाती थी। नए बीएनएस कानून के तहत यह बड़ी राहत है।

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