हरियाणा में मानसून की रफ्तार धीमी, किसानों की बढ़ी चिंता; नहीं बरसे मेघ तो बढ़ेगी फसलों की लागत

Edited By Harman, Updated: 03 Aug, 2026 03:07 PM

monsoon slows down in haryana

हरियाणा के सिरसा जिले में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल की तुलना में मई, जून और जुलाई तीनों महीनों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।

सिरसा (सतनाम सिंह) : हरियाणा के सिरसा जिले में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल की तुलना में मई, जून और जुलाई तीनों महीनों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि फिलहाल फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो विशेष रूप से धान की फसल प्रभावित हो सकती है।

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सिरसा जिले में इस बार सूखे की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं। मानसून की कमजोर बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल मई, जून और जुलाई तीनों महीनों में बारिश का आंकड़ा काफी कम रहा है। कृषि विभाग के अनुसार, मई 2025 में जहां 38 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, वहीं मई 2026 में यह घटकर केवल 10 मिलीमीटर रह गई। इसी तरह जून 2025 में 47 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि जून 2026 में केवल 16 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। जुलाई 2025 में 84 मिलीमीटर बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई 2026 में महज 22 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।

कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखदेव सिंह कंबोज का कहना है कि फिलहाल कम बारिश का फसलों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। जिले में किसानों ने समय पर बुवाई और रोपाई का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। सिरसा में करीब 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई है। इसके अलावा 1 लाख 29 हजार हेक्टेयर में कपास, लगभग 6 हजार हेक्टेयर में बाजरा और करीब 7 हजार हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कपास की फसल पर कम बारिश का ज्यादा असर नहीं पड़ता, क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ सकती है। लेकिन धान की खेती पूरी तरह पानी पर निर्भर होती है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों की लागत बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।

 हालांकि मौसम को लेकर राहत की उम्मीद भी जताई जा रही है। कृषि विभाग का कहना है कि सावन के महीने में बारिश की संभावना बढ़ी है। यदि मानसून सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है तो खेतों में नमी लौट आएगी और फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा। किसान भी अब आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल सिरसा में स्थिति नियंत्रण में है और कृषि विभाग लगातार फसलों की निगरानी कर रहा है। लेकिन यदि आने वाले दिनों में मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी, तो सबसे बड़ा खतरा धान की फसल पर मंडरा सकता है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब सावन की बारिश पर टिकी हुई हैं।
 

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