Edited By Shivam, Updated: 28 Jun, 2021 07:41 PM

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने आपातकाल इमरजेंसी के अपने अनुभवों पर कहा कि तब जब सभी संस्थाएँ निरस्त हो चुकी थीं और आम जनता अपने मूल अधिकार खो चुकी थी। सरकार के विरोध में उठने वाले हर स्वर और प्रयास को नाकाम कर उन व्यक्तियों को जेल में डाल दिया...
चंडीगढ़ (पंचकूला): विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने आपातकाल इमरजेंसी के अपने अनुभवों पर कहा कि तब जब सभी संस्थाएँ निरस्त हो चुकी थीं और आम जनता अपने मूल अधिकार खो चुकी थी। सरकार के विरोध में उठने वाले हर स्वर और प्रयास को नाकाम कर उन व्यक्तियों को जेल में डाल दिया जाता था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मारी जा चुकी थी और सत्ता की लोभी प्रधानमंत्री एक तानाशाह बन चुकी थीं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारतीय लोकतंत्र का यह काला अध्याय ‘आपातकाल’ के नाम से जाना जाता है।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा सन 1975 इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके चुनाव अभियान के लिए सरकारी तंत्र के दूरी उपयोग के आरोप में दोषी पाते हुए उनका चुनाव अमान्य घोषित किया। अदालत ने उनके चुनाव को अमान्य घोषित करते हुए उनके लोकसभा की सदस्यता निरस्त कर दी थी। तब इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी मगर वहाँ उन्हें सफलता नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी को मिलने वाले सभी विशेषाधिकार छीन लिया जाए, मगर फैसला होने तक उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में बने रहने की अनुमति दे दी गई थी।
ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता की चाहत में 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करवाई। यह आपातकाल 21 महीने यानी 21 मार्च 1977 तक चला। उन्होंने कहा इस दौरान इंदिरा गांधी ने अपने सभी राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया और प्रेस पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। उन्होंने बताया कि जेल में बंद नेताओं को थर्ड डिग्री का उत्पीडऩ किया जाता था। इंदिरा गांधी ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था, बताया कि किसी भी नेता या व्यक्ति को विरोध करने का कोई हक नहीं था और ना ही वह न्यायालय में चुनौती दे सकता था।
ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा संगठन के आदेश अनुसार मैं जेल नहीं गया था, हम बाहर रहकर जेल में गए लोगों के परिवारों का ख्याल रख रहे थे। संगठन का आदेश था कि अगर सभी जेल चले गए तो उनके परिवारों का ख्याल कौन रखेगा।
गुप्ता ने कहा कि इंदिरा गांधी का प्रयास था कि लोकसभा 5 वर्ष की बजाय 6 वर्ष की हो,फैमिली प्लानिंग शुरू किया गया था। लोगों की जबरदस्ती नसबंदी की गई थी। उन्होंने कहा उस समय 18 वर्ष के बच्चों की नसबंदी कर दी गई थी। प्रेस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने बताया आपातकाल में 175751 लोग देश में गिरफ्तार हुए थे तथा वर्तमान में आज हरियाणा में 382 लोग जीवित हैं। उन्होंने कहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगने के बावजूद भी पूरा संगठन खड़ा था, जो लोग जेलों में चले गए थे उनके परिवार वालों के लिए खाना, दवाइयों की व्यवस्था बाहर रहने वाले लोग किया करते थे।
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