Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 05 Oct, 2025 11:25 PM

करीब दो साल पहले सेक्टर-37 थाना एरिया के एक होटल में युवक की संदिग्ध मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हुआ है। दो साल से लंबित चल रहे मामले में जब कोर्ट ने जांच अधिकारी को जमकर फटकार लगाई तो दो घंटे में ही मामला दर्ज कर एफआईआर की कॉपी...
गुड़गांव, (ब्यूरो): करीब दो साल पहले सेक्टर-37 थाना एरिया के एक होटल में युवक की संदिग्ध मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हुआ है। दो साल से लंबित चल रहे मामले में जब कोर्ट ने जांच अधिकारी को जमकर फटकार लगाई तो दो घंटे में ही मामला दर्ज कर एफआईआर की कॉपी कोर्ट में जमा की गई। मामले में अदालत के आदेश पर सेक्टर-37 में युवती व उसके परिजनों के खिलाफ आईपीसी 302, 34 के तहत केस दर्ज किया गया है।
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जानकारी के मुताबिक, मृतक चंद्रमोहन के परिजनों ने अदालत में अपने वकील के माध्यम से सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत याचिका दायर की थी। वकील रोहित मदान ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि चंद्रमोहन की मौत संदिग्ध नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश के तहत की गई है। शिकायत के अनुसार, मृतक चंद्रमोहन के पिता दिनेश कुमार का पड़ोसी परिवार, जिसमें सत्यप्रकाश उर्फ सोनू, उनकी पत्नी पिंकी, बेटे यश कुमार और बेटी मुस्कान शामिल हैं, ने पहले 26 सितंबर 2023 को चंद्र मोहन के साथ लड़ाई-झगड़ा किया था और जान से मारने की धमकी दी थी।
इसके बाद 9 अक्टूबर 2023 को आरोपी मुस्कान ने चंद्रमोहन को फोन कर गुरुग्राम के पीयूष होटल, हीरो होंडा चौक पर बुलाया। अगले दिन 10 अक्टूबर 2023 को पिता दिनेश कुमार को मुस्कान ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए सूचना दी कि चंद्रमोहन की हालत गंभीर है। इसी दौरान पिंकी ने दिनेश कुमार का मोबाइल फोन भी छीन लिया था। उसी रात लगभग 9 बजे, पुलिस ने सूचना दी कि चंद्रमोहन का देहांत हो गया है।
वकील रोहित मदान ने बताया कि शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को केवल 174 सीआरपीसी (संदिग्ध परिस्थितियों में मौत) के तहत कार्रवाई की थी। और मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर एफएसएल को सैंपल भेजे थे। हालांकि, एफएसएल रिपोर्ट पर बोर्ड द्वारा मौत के संबंध में स्पष्ट राय न मिलने और पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट पेश करने में देरी के चलते, शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामले में JMIC हरिकिशन की अदालत ने एक महीने पहले सेक्टर-37 थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
इस मामले में पुलिस ने एक्शन टेशन रिपोर्ट तो पेश कर दी थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की थी। मामले में अदालत ने जांच अधिकारी को जमकर फटकार लगाई और मामले में केस दर्ज न करने का कारण पूछा। वहीं, अदालत ने तुरंत प्रभाव से मामले में एफआईआर दर्ज कर इसकी कॉपी अदालत में जमा कराने के आदेश दिए। वकील रोहित मदान ने बताया कि मामले में दोपहर 12 बजे आदेश देने के बाद सेक्टर-37 थाना पुलिस ने दोपहर ढाई बजे तक इस मामले में केस दर्ज कर इसकी कॉपी अदालत में जमा कराई है।