हाईवे से हटने को तैयार नहीं किसान, केंद्र से केवल फोन पर चल रहा बातचीत का सिलसिला

Edited By Isha, Updated: 29 Nov, 2020 10:42 AM

farmers not ready to withdraw from highway

सिंघु बार्डर पर डटे किसान न तो आगे बढऩे को तैयार, न पीछे हटने को। बार्डर से बीसवां मिल तक हाईवे पर डेरा जमाए बैठे किसान अब यहां से उठने को राजी नहीं हैं। दिन भर किसान नेताओं व सरकार की ओर से फोन पर बातचीत तो होती रही लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकला।...

सोनीपत (दीक्षित): सिंघु बार्डर पर डटे किसान न तो आगे बढऩे को तैयार, न पीछे हटने को। बार्डर से बीसवां मिल तक हाईवे पर डेरा जमाए बैठे किसान अब यहां से उठने को राजी नहीं हैं। दिन भर किसान नेताओं व सरकार की ओर से फोन पर बातचीत तो होती रही लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकला। बीच-बीच में किसानों ने प्रदर्शन किया और 2 बार पी.एम. नरेंद्र मोदी का पुतला फंूक व सरकार की शव यात्रा निकाल कर रोष भी जताया।  इस बीच किसानों के जत्थों का धरनास्थल पर आना जारी रहा जिससे संख्या बल लगातार बढ़ रहा है। वहीं किसानों के वाहनों की वजह से के.एम.पी. के गोल चक्कर तक हाईवे के दोनों मार्ग जाम हो गए हैं। आंदोलनरत किसानों ने साफ कर दिया कि हाईवे से हटने का उनका कोई इरादा नहीं है। जब तक सरकार का जिम्मेदार कोई नुमाइंदा आकर बातचीत कर लिखित भरोसा नहीं देता, वे नहीं मानेंगे। 

किसानों का तर्क है कि बातचीत के लिए जो फोन पर केंद्र सरकार की ओर से संवाद हो रहा है उसमें कोई जिम्मेदार व्यक्ति बातचीत को आगे नहीं आ रहा। ऐसे में किसानों ने तय कर लिया है कि पी.एम. या गृह मंत्री बातचीत के लिए लिखित में न्यौता देते हैं और यह भरोसा देते हैं कि उनकी मांग पूरी की जाएगी तो वे यहां से हटेंगे। सरकार दिल्ली बुलाकर उन्हें हाईवे से हटाना चाहती है ताकि आवाजाही चालू हो जाए। इसके बाद उन्हें पता है कि किसान की बात कोई नहीं सुनेगा। 
पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष भोग सिंह मानसा ने कहा कि यह मुद्दा सीधा केंद्र से जुड़ा है, ऐसे में वहां से कोई जिम्मेदारी से बातचीत करे तो ही हल संभव है। किसान किसी तरह का तनाव न तो पहले चाहता था और न ही अब चाहता है। वे शांतिपूर्वक मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। 
 

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