Edited By Harman, Updated: 28 May, 2026 06:19 PM

जिले के बराना गांव स्थित सुपर-100 एनजीओ स्कूल पर गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत भेजी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ने संस्थान में पढ़ रहे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और उन्हें इच्छा के विरुद्ध रोककर...
कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : जिले के बराना गांव स्थित सुपर-100 एनजीओ स्कूल पर गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत भेजी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ने संस्थान में पढ़ रहे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और उन्हें इच्छा के विरुद्ध रोककर रखने के आरोप लगाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि सरकार के संरक्षण में संचालित इस संस्थान में बच्चों को आईआईटी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है, लेकिन अंदर की व्यवस्थाएं बेहद चिंताजनक हैं। आरोप है कि कई बच्चों को उनकी इच्छा के खिलाफ संस्थान में रोका जा रहा है। जब अभिभावक अपने बच्चों को वापस ले जाने पहुंचे तो उन्हें विभिन्न नियमों और अधिकारियों के पत्रों का हवाला देकर रोक दिया गया। यहां तक कि बच्चों को ले जाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) समेत अन्य अधिकारियों की अनुमति मांगे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में हॉस्टल और बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बच्चों को बदबूदार और कीड़ों वाला पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। करीब 250 बच्चों के लिए केवल 7 से 8 शौचालय होने की बात कही गई है। साथ ही कई बार बच्चों को लंबे समय तक शौचालय जाने की अनुमति नहीं देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि संस्थान में बच्चों पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता है, जिससे कई बच्चे तनाव और भय में रह रहे हैं। शिकायत के अनुसार संस्थान से बाहर आए कुछ बच्चे सामान्य रूप से बातचीत तक नहीं कर पा रहे थे। एक बच्चे ने बाहर निकलते ही खुद को “आजाद” महसूस करने की बात कही। बच्चों के साथ मारपीट और शारीरिक हिंसा के आरोप भी लगाए गए हैं।
आरोप यह भी है कि संस्थान प्रबंधन ने अपनी छवि बचाने के लिए कुछ बच्चों से दबाव में लिखित और रिकॉर्डेड बयान दिलवाए। शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
आयोग के समक्ष रखी गई मांगों में बच्चों और अभिभावकों के बयान बिना दबाव के दर्ज करने, हॉस्टल, भोजन और स्वच्छता व्यवस्था की जांच कराने, दोषी पाए जाने पर प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा बच्चों के मौलिक और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में संस्थान का दौरा किया था और इस प्रकार की कोई स्थिति सामने नहीं आई। उन्होंने बताया कि बच्चों से भी बातचीत की गई थी। उनके अनुसार संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित हो रहा है और नया सत्र 13 मई से शुरू हुआ है। संभव है कि कुछ बच्चे अभी नए माहौल में पूरी तरह ढल नहीं पाए हों। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह उनसे सीधे मिल सकता है।