Haryana: श्रमिकों के फर्जी पंजीकरण मामले में दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध एक्शन की तैयारी में अनिल विज

Edited By Manisha rana, Updated: 16 Apr, 2026 06:01 PM

anil vij in action in fake registration case of workers

हरियाणा के श्रम, ऊर्जा और परिवहन मंत्री श्रम विभाग में श्रमिकों के फर्जी पंजीकरण मामले में जहां दोषी पाए जाने वालों के  विरुद्ध एक्शन की तैयारी में हैं। वहीं वर्क स्लिप घोटाले के बाद श्रमिकों के नाम पर निर्माण कार्यों को लेकर खेल करने और मोटा माल...

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा के श्रम, ऊर्जा और परिवहन मंत्री श्रम विभाग में श्रमिकों के फर्जी पंजीकरण मामले में जहां दोषी पाए जाने वालों के  विरुद्ध एक्शन की तैयारी में हैं। वहीं वर्क स्लिप घोटाले के बाद श्रमिकों के नाम पर निर्माण कार्यों को लेकर खेल करने और मोटा माल डकारने वालों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि वर्क स्लिप घोटाले के बाद अब श्रम मंत्री विभाग में होने वाले बाकी खेल पर भी  शिकंजा कसने की तैयारी में हैं।

भरोसेमंद उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पहले जहां जिलों में श्रमिकों के पंजीकरण और श्रमिकों के नाम पर दिए जाने वाले लाभकारी स्कीमों के नाम पर गोलमाल कर बड़ी मोटी धनराशि डकारी गई। अब श्रम विभाग में चलने वाले अन्य खेल को लेकर भी श्रम मंत्री गंभीर नजर आ रहे हैं, बताया जा रहा है कि कुछ अन्य स्कीमों और निर्माण कार्यों और श्रमिकों के नाम पर कुछ अन्य स्कीमों भी बड़ा खेल किया गया। जिन स्कीमों का फायदा श्रमिकों को होना चाहिए था, उनके नाम पर बिचौलिये खेल कर गए। मंत्री विज की इस तरह के खेल के पीछे की काली भेड़ों पर नजर चली गई है, आने वाले दिनों में वर्क स्लिप की तरह से ही कुछ अन्य गोलमाल पर भी जांच के आदेश किए जा सकते हैं।

मजदूरों के हकों पर डाका 

यहां पर याद दिला दें कि हरियाणा में मजदूर कल्याण योजनाओं में पहले ही पंजीकरण और वर्क स्लिप के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आ चुका है। पूरे मामले में गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने एक जांच कमेटी गठित कर दी थी  और पूरे मामले पड़ताल के बाद यह  भी साफ हुआ है कि 1500 करोड़ से अधिक की राशि का खेल हो गया।  जांच पड़ताल किसी निजी एजेंसी ने नहीं बल्कि विभिन्न जिलों के डीसी की अध्य़क्षता में कराई गई थी। जिसमें 90 फीसदी से अधिक वर्क स्लिप फर्जी पाई गईं हैं। कई जिलों में तो 97 फीसदी तक गड़बड़ी मिली थी। उपायुक्तों की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हो चुके हैं। कई जिलों में 87.6% से 97फीसदी तक वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं। ये स्लिप 90 दिन के काम का प्रमाण होती हैं। जिस पर योजनाओं का लाभ मिलता है।

आंकड़ों पर गौर करें, तो  कुल जांची स्लिप: 21,78,523 हैं।  जिसमें फर्जी/अमान्य स्लिप: 19,07,578 पाई गईं और सही स्लिप: 2,70,945 मिली हैं। अगर जिलों की बात करें, तो ज्यादा फर्जीवाड़ा यमुनानगर: 98.67 फीसदी और कैथल: 98.91 फीसदी तक मिला है।  इसके अलावा पानीपत: 98.20 फीसदी, जबकि फरीदाबाद में 97.05 फीसदी व नूंह: 97.90 फीसदी संख्या के हिसाब से टॉप जिलों में आते हैं।

हिसार: 98,615  
कैथल: 2,22,490
जींद: 2,10,875
भिवानी: 1,92,473
नूंह: 1,25,955 इन मामलों में फर्जी पंजीकरण और बिना काम के स्लिप जारी

प्रारंभिक जांच में फर्जी मजदूरों का पंजीकरण किया गया। बिना काम के वर्क स्लिप जारी की गईं । एक फर्जी लाभार्थी ने करीब ₹2.5 लाख तक का फायदा उठा लिया । 

मातृत्व सहायता: ₹36,000
पितृत्व सहायता: ₹21,000
शिक्षा सहायता: ₹8,000 से ₹20,000
स्कॉलरशिप: ₹51,000 तक
हॉस्टल सहायता: ₹1.2 लाख
कोचिंग सहायता: ₹1 लाख
लैपटॉप अनुदान: ₹49,000
ई-स्कूटर प्रोत्साहन: ₹50,000
विवाह सहायता: ₹50,000
इलाज सहायता: ₹1 लाख तक
दिव्यांग सहायता: ₹3 लाख तक

मंत्री ने खुद पकड़ा घोटाला

श्रम मंत्री ने खुद गड़बड़ी को पकड़ा और प्रारंभिक जांच के आदेश दिए।  जबकि जनवरी में मुख्यमंत्री ने हाई लेवल कमेटी गठित कर दी थी। जिला स्तर पर डीसी की अगुवाई में टीमों ने पिछले दो साल के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया। सत्यापित मजदूरों की आईडी दोबारा सक्रिय करने के लिए पोर्टल खोला जाएगा। मजदूरों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा और पूरी रिपोर्ट की समीक्षा उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है। 

 

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