हिसार में यहां 10 किमी एरिया कंटेनमेंट घोषित, जिला प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट... जानिए कारण

Edited By Isha, Updated: 15 Nov, 2025 06:37 PM

a 10 km containment zone has been declared in hisar

शहर में ग्लैंडर्स रोग से एक घोड़ी की मौत का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने अश्व प्रजाति के पशुओं को जिले से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है

हिसार: शहर में ग्लैंडर्स रोग से एक घोड़ी की मौत का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने अश्व प्रजाति के पशुओं को जिले से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही घोड़ों की दौड़, मेले, प्रदर्शनी व खेल आयोजनों पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। पशुपालन विभाग 2 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी अश्व प्रजाति के पशुओं के सैंपल लेकर जांच करेगा। चूंकि यह रोग मनुष्यों में भी फैल सकता है, इसलिए घोड़ी के संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच करवाई जाएगी।

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने बताया कि जिले में ग्लैंडर्स का नया मामला पुष्टि हुआ है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार की लैब रिपोर्ट में एक घोड़ी संक्रमित पाई गई थी, जिसकी मृत्यु 6 नवंबर को हो चुकी है। 12 नवंबर को आई रिपोर्ट के बाद विभाग ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं के स्वास्थ्य पर नजर रखें और कोई भी संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत सूचना दें।

मृत घोड़ी का मालिक 12 क्वार्टर एरिया का रहने वाला है। उसके अनुसार घोड़ी को मिर्जापुर रोड स्थित फार्म पर रखा गया था और वह इसे शौक के तौर पर पालता था। बताया कि घोड़ी इसी माह के पहले सप्ताह में बीमार हुई थी, जिसके बाद वह इसे लुवास ले गया था। 6 नवंबर को उसकी मौत हो गई। घोड़ी के मालिक ने बताया कि उसके परिवार के किसी भी सदस्य के सैंपल अब तक नहीं लिए गए हैं, हालांकि विभाग की ओर से यह जरूर पूछा गया कि परिवार में कोई बीमार तो नहीं है।

यह होता है ग्लैंडर्स रोग

ग्लैंडर्स एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से घोड़े, खच्चर और गधों में पाई जाती है। इसमें संक्रमित पशु की नाक से खून बहता है और शरीर पर फोड़े बन जाते हैं। संक्रमण अन्य पशुओं में भी फैल सकता है। बीमारी की पुष्टि होने पर संक्रमित पशु को नियमानुसार मार दिया जाता है। यह एक जूनोटिक रोग है, यानी पशुओं से मनुष्यों में भी फैल सकता है। हालांकि यह दुर्लभ है, लेकिन संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने वालों को यह जोखिम होता है।

 

  
 

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