पटौदी में जमीन रजिस्ट्री में गड़बड़ी, महिला तहसीलदार सहित 11 के खिलाफ केस दर्ज

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 17 Jun, 2026 08:17 PM

11 including lady tehsildar booked in case of land fruad

पटौदी उपमंडल में राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की कीमती जमीन को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत तकसीम करने के मामले में मंगलवार को पटौदी थाने में तत्कालीन महिला तहसीलदार,रीडर सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह...

गुड़गांव, (ब्यूरो): पटौदी उपमंडल में राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की कीमती जमीन को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत तकसीम करने के मामले में मंगलवार को पटौदी थाने में तत्कालीन महिला तहसीलदार,रीडर सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह मामला कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। 

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जानकारी के मुताबिक, गांव घीलनावास निवासी रोहित शर्मा ने कोर्ट को बताया कि गांव में उनके पिता की सह-स्वामित्व वाली कृषि भूमि थी। इस संयुक्त जमीन में उनके पिता का न्यायसंगत 1/15वां हिस्सा था। आरोप है कि आरोपियों ने एक गहरी साजिश के तहत उनके पिता को इस हक से पूरी तरह वंचित कर दिया। प्रमाणित सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जमीन बंटवारे का आवेदन आधिकारिक तौर पर दो जुलाई 2024 को तहसीलदार के सामने आया था,लेकिन हैरानी की बात यह है कि समन जारी करने, मुनादी कराने और अंतरिम आदेशों की सारी कागजी कार्रवाई महीनों पहले यानी मार्च 2024 की तारीखों में ही पूरी दिखा दी गई।

 

बंटवारे का अंतिम आदेश 17 जुलाई 2024 को जारी किया गया, जबकि उसमें शामिल पक्षों के हस्ताक्षर पर भविष्य की तारीख यानी आठ सितंबर 2024 दर्ज थी। इसने साफ कर दिया कि दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे। इस जमीन की एक हिस्सेदार आनिका की मौत दिसंबर 2017 में ही हो चुकी थी। आरोपियों ने उसके नाबालिग वारिस के हक को मारने के लिए वर्ष 2024 की इस सरकारी कार्रवाई में आनिका को जिंदा दिखा दिया।

 

अप्रैल 2024 में तैयार शुरुआती नक्शे में शिकायतकर्ता के पिता का नाम हिस्सेदार के रूप में दर्ज था, लेकिन बाद के नक्शों और अंतिम आदेश से उनका नाम जानबूझकर गायब कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ 19 मई 2025 को सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई थी,लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि इस शिकायत की जांच खुद आरोपी महिला तहसीलदार को ही सौंप दी गई। तहसीलदार ने शिकायत को यह कहकर खुद ही बंद कर दिया कि जिसको दिक्कत है, वह कोर्ट जाए। इस तरह उन्होंने खुद को ही क्लीन चिट दे दी। पटौदी थाना प्रभारी ने बताया कि अदालत के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार और रीडर सहित 11 लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। राजस्व रिकॉर्ड के सभी असली दस्तावेजों को कब्जे में लेकर गहनता से जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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