Edited By Krishan Rana, Updated: 24 Mar, 2026 07:49 PM
केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने विभाग की योजनाओं की समीक्षा करने
नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने विभाग की योजनाओं की समीक्षा करने, नई योजनाएं लागू करने के साथ ही अब जमीनी स्तर पर विकास कार्यों का निरीक्षण भी शुरू कर दिया है। विशेष बात यह है कि इस दौरान वे स्थानीय लोगों से संवाद करते हैं और फिर फीडबैक के आधार पर योजनाओं में सुधार करने के साथ ही अधिकारियों को निर्देश भी देेते हैं।
इस कड़ी में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री ने मंगलवार को दिल्ली के बदरपुर स्थित एन.टी.पी.सी. इको पार्क में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया और इसके बाद एक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया। इस संदर्भ में उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि आज दिल्ली के बदरपुर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में प्रगतिरत विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण कर विस्तृत समीक्षा बैठक की तथा संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एन.टी.पी.सी. इको पार्क केवल एक हरित स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और शहरी क्षेत्र में सतत विकास के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभर रहा है। ऐसे प्रयास न केवल प्राकृतिक संतुलन को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नागरिकों को स्वच्छ, स्वस्थ और जागरूक जीवनशैली की ओर भी प्रेरित करते हैं।
ऐसे ही केंद्रीय ऊर्जा व शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को भारत मंडपम में विकसित भारत-2047 तक आयोजित मंत्रिस्तरीय एवं पी.एस.यू. नेतृत्व संवाद की बैठक में हिस्सा लिया और इस आशय के बारे में उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि भारत मंडपम में विकसित भारत 2047 के लिए आयोजित मंत्रिस्तरीय एवं पी.एस.यू. नेतृत्व संवाद में कैबिनेट सहयोगियों के साथ भाग लिया।

इस अवसर पर पूज्य श्री श्री रविशंकर की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। ऐसे मंच सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के नेतृत्व को एक दिशा में जोडऩे, रणनीतिक सोच को सुदृढ़ करने तथा समन्वित कार्रवाई को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए। पूज्य श्री श्री रवि शंकर द्वारा मूल्य-आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देने और सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करने के निरंतर प्रयासों ने इस पहल को और गहराई एवं उद्देश्य प्रदान किया है। यह विकसित भारत 2047 के लिए समग्र, दूरदर्शी और संतुलित शासन व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित करता है।’
अमृत मिशन योजना के उद्देश्य के बारे में संसद में दी जानकारी
इससे पहले सोमवार को राज्यसभा में अमृत मित्र योजना के बारे में अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस योजना के तहत पूरे देशभर में 45 हजार महिलाओं को जोड़ा गया है। इस योजना का मकसद महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है। आने वाले समय में 45 हजार महिलाओं की संख्या बढ़ाकर 2 लाख करना है। मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जनभागीदारी से जोडऩे के उद्देश्य और जल प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए ही अमृत मित्रों की अहम भूमिका है।
इसी तरह से इस योजना से स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया है। उल्लेखनीय है कि मिशन (अमृत) का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जून 2015 को किया गया था । इस मिशन का उद्देश्य 500 शहरों व कस्बों में बुनियादी शहरी अवसंरचना में सुधार करना है। यह मिशन केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में संचालित किया जा रहा है । केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना के काफी अच्छे परिणाम आ रहे हैं और भविष्य में इस योजना का और विस्तार किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री की पहल के बाद स्वच्छता बनी जन आंदोलन
खास बात यह है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की पहल के बाद स्वच्छ भारत मिशन: अर्बन 2.0 के प्रभाव से देश भर में स्वच्छता एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। इसी प्रेरणा से गोरखपुर नगर निगम ने रामघाट, राप्ती नदी के तट पर एक प्रेरणादायक स्वच्छता अभियान का आयोजन किया। स्वच्छता की नई पहल :‘बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ’ नाम के इस अभियान ने न केवल घाट की तस्वीर बदली, बल्कि नागरिकों के मन में जिम्मेदारी की नई चेतना भी जगाई है। विशेष बात यह है कि सुबह की हल्की धूप और राप्ती के शांत प्रवाह के बीच रामघाट पर अभियान के दौरान एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिलती है।
500 से अधिक नागरिक, यूनिवर्सिटी के छात्र, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी एक ही उद्देश्य, अपने शहर को स्वच्छ, सुंदर और जागरूक बनाने के लिए से एकत्रित होकर आगे बढ़ रहे हैं। अभियान के दौरान घाट परिसर और नदी तट से 170 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। इस कचरे को वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्चक्रण के लिए भेजा गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है। यह पहल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को यह समझाने का माध्यम भी बनी कि प्लास्टिक प्रदूषण नदी और ईको-सिस्टम के लिए कितना हानिकारक है? इस अभियान का सबसे आकर्षक पहलू रहा ‘पेंट माई घाट’ कार्यक्रम।
घाट की दीवारों और सीढिय़ों पर रंग-बिरंगी कलाकृतियां उकेरी गईं। इन चित्रों में नदी संरक्षण के संदेश, स्वच्छता की प्रेरक झलकियां और स्थानीय संस्कृति की अभिव्यक्ति देखने को मिली। कहीं बच्चों को कचरा डस्टबिन में डालते देखा गया, तो कहीं मेरा घाट, मेरी जिम्मेदारी जैसे संदेशों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन कलाकृतियों ने रामघाट को न केवल स्वच्छ बल्कि सौंदर्यपूर्ण और जीवंत बना दिया।
अभियान का प्रभाव तुरंत दिखाई देने लगा, स्थानीय नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी और नदी किनारे कचरा फैंकने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय कमी आई। जो लोग पहले ऐसे अभियानों से दूर रहते थे, वे भी इस पहल का हिस्सा बने। विशेष रूप से युवाओं में जिम्मेदारी की भावना प्रबल हुई। छात्रों के लिए यह केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सीख बनी कि शहर की स्वच्छता में उनकी सक्रिय भूमिका है।
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