राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कसी कमर, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व चुनाव के पर्यवेक्षक हर्ष सांघवी पहुंचे चंडीगढ़

Edited By Krishan Rana, Updated: 10 Mar, 2026 09:35 PM

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हरियाणा में भाजपा के लिए राज्य सभा चुनावों में हरियाणा की दूसरी सीट कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा में भाजपा के लिए राज्य सभा चुनावों में हरियाणा की दूसरी सीट कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इससे लगता है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी चण्डीगढ़ पहुंचे हैं। हरियाणा राज्यसभा चुनाव के पर्यवेक्षक गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। हरियाणा के केबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने मनोहर लाल व हर्ष सांघवी का स्वागत किया। मनोहर लाल के कार्यकाल में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के राज्य सभा चुनाव परिणामों में कांग्रेस मात खा चुकी है।
      
राज्यसभा की एक सीट संजय भाटिया को पूर्ण रूप से भाजपा की झोली में है।दूसरी सीट आंकड़ों व विधानसभा सीटों के दृष्टिकोण से कांग्रेस के पक्ष में है।मगर आजाद उम्मीदवार सतीश नांदल ने नामांकन वापिस न लेने के बाद अब इस सीट पर मुकाबला रोचक होता नजर आ रहा है।कांग्रेस के 37 विधायकों में से कितने विधायक कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के साथ टिकते हैं व कितने भीतरीगात करते हैं कि चर्चाएं अभी से राजनैतिक हलकों में शुरू है।
       
उल्लेखनीय है कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा शासित हरियाणा सरकार में मनोहर लाल साढ़े नौ साल हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं।राजनीति में कुशल एवं कांग्रेस के विधायकों में भी मजबूत पकड़ अपनी कार्यप्रणाली से रखने वाले मनोहर लाल हरियाणा की राजनीति के चाणक्य भी है।मनोहर लाल ने अपने कार्यकाल में हुए हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के राज्य सभा चुनावों में चुनाव परिणाम भाजपा व भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को जीता पक्ष में लाकर अपना राजनैतिक कौशल दिखाया है। मनोहर लाल की टीम में तरुण भंडारी जैसे कर्मयोधा भी है। तरुण भंडारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के भी राजनैतिक सचिव है।

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मनोहर लाल का कुशल नेतृत्व और राजनीतिक कौशल
हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल खट्टर को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने अपने शांत स्वभाव, संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक कौशल के बल पर राज्य की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके लंबे संगठनात्मक संघर्ष और नेतृत्व क्षमता का परिणाम माना जाता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले मनोहर लाल खट्टर ने वर्षों तक संगठन में काम करते हुए कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संपर्क बनाए। यही अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में बहुत उपयोगी साबित हुआ। वर्ष 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में पहली बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई, तब उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह निर्णय आश्चर्यजनक था, लेकिन खट्टर ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सादगी और पारदर्शिता को प्राथमिकता देकर अपनी अलग पहचान बनाई।
मुख्यमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों और सुशासन की दिशा में कई पहलें की गईं। ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करना और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाना उनकी कार्यशैली की विशेषता मानी गई। इसके साथ ही उन्होंने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने का प्रयास किया।

मनोहर लाल खट्टर का राजनीतिक कौशल उस समय भी देखने को मिला जब राज्य में विभिन्न राजनीतिक चुनौतियां सामने आईं। विपक्ष के आरोपों और राजनीतिक दबाव के बावजूद उन्होंने संयम और रणनीति के साथ परिस्थितियों का सामना किया। यही कारण है कि वे लगातार दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और राज्य की राजनीति में स्थिर नेतृत्व प्रदान करने में सफल रहे।आज भी हरियाणा की राजनीति में उनका अनुभव और संगठनात्मक पकड़ महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके नेतृत्व और राजनीतिक कौशल को भाजपा की राज्य इकाई के लिए एक मजबूत आधार के रूप में देखा जाता है।

तरुण भंडारी की सक्रियता से भाजपा में शामिल हुए कई कांग्रेस नेता हरियाणा की राजनीति में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी पिछले कुछ समय से काफी सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ उन्होंने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस के कई नेताओं को भारतीय जनता पार्टी में शामिल करवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा रही है कि तरुण भंडारी ने अपने व्यापक संपर्कों और राजनीतिक संवाद के माध्यम से कई जिलों में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाजपा की नीतियों से जोड़ने का काम किया है। इसी रणनीति के तहत दर्जनों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल की संगठनात्मक स्थिति कई क्षेत्रों में मजबूत हुई है।

इन नेताओं में प्रमुख नाम  कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तोशाम से कई बार विधायक रह चुकी किरण चौधरी का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव रहा। किरण चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के परिवार से आती हैं और भिवानी क्षेत्र में उनका अच्छा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। उनके भाजपा में आने को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना गया। कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल भी पहले कांग्रेस में ही थे।

इसके अलावा सोनीपत और आसपास के क्षेत्रों के कई कांग्रेस नेताओं को भी भाजपा में शामिल करवाने में तरुण भंडारी की सक्रियता बताई जाती है। इनमें भूपेंद्र मलिक, सुरेंद्र लाठर, पवन खरखौदा, निखिल मदान और अनिल शर्मा जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। इन नेताओं के भाजपा में आने से कई क्षेत्रों में पार्टी की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने का दावा किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में भाजपा की रणनीति संगठन का विस्तार करने और विपक्ष के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के अंदर ऐसे नेताओं की भूमिका भी बढ़ी है जो राजनीतिक संवाद और संपर्क के माध्यम से नए नेताओं को पार्टी से जोड़ सकें।

मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव के रूप में तरुण भंडारी को भी ऐसे ही राजनीतिक प्रबंधकों में गिना जाने लगा है, जो विभिन्न जिलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर भाजपा संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए हरियाणा की राजनीति में इस तरह के राजनीतिक समीकरण आगे भी देखने को मिल सकते हैं।

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