Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 25 Apr, 2026 08:38 PM

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में एक करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। डीएलएफ फेज-दो थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी के ही एक सीनियर मैनेजर ने अपने पूर्व सुपरवाइजर और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस बड़ी साजिश को अंजाम...
गुड़गांव, (ब्यूरो): लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में एक करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। डीएलएफ फेज-दो थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी के ही एक सीनियर मैनेजर ने अपने पूर्व सुपरवाइजर और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस बड़ी साजिश को अंजाम दिया।
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जानकारी के अनुसार कंपनी को 26 जनवरी 2026 को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसमें कंपनी के भीतर चल रहे करोड़ों के वित्तीय घोटाले का संकेत दिया गया था। इसके बाद जब कंपनी ने आंतरिक जांच शुरू की, तो परत दर परत चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि आरोपी सीनियर मैनेजर ने जून 2023 में कंपनी की ओर से पाइन लैब्स को छह कार्ड जारी करने के निर्देश दिए थे। इनमें से चार कार्ड उसने खुद के नाम पर बनवाएं। आरोपियों ने इन कार्ड्स को उन मोबाइल नंबरों से सक्रिय किया जो कंपनी के रिकॉर्ड में नहीं थे। हैरानी की बात यह है कि धोखाधड़ी के लिए ऐसे कार्ड्स का भी इस्तेमाल किया गया जो कंपनी के उन कर्मचारियों के नाम पर जारी थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। आरोपियों ने विशेष रूप से तीन कार्ड का इस्तेमाल कर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की।
आंतरिक पूछताछ के दौरान आरोपी मैनेजर ने स्वीकार किया कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड उसका पूर्व सुपरवाइजर था। सुपरवाइजर ही कार्ड्स का इस्तेमाल करता था और बदले में मैनेजर को उसका हिस्सा देता था। व्हाट्सऐप डिस्प्ले पिक्चर से भी आरोपी की संलिप्तता के डिजिटल सबूत मिले हैं। मामला तब और पेचीदा हो गया जब जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी ने कंपनी को सुसाइड करने की धमकी दी, ताकि कानूनी कार्यवाही को रोका जा सके। कंपनी ने सुरक्षा के मद्देनजर इसकी सूचना पहले ही स्थानीय पुलिस को दे दी थी।
डीएलएफ फेज-2 थाना पुलिस ने लाइफ इंश्योरेंस के एवीपी हिमांशु भारद्वाज की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, यस बैंक और एसबीआई के संबंधित खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आर्थिक अपराध शाखा इस मामले में डिजिटल फुटप्रिंट्स और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है ताकि रकम को बरामद किया जा सके। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी की शिकायत और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के दौरान जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी और फंड ट्रेल का पता लगाया जाएगा।